भोलारी एयरबेस पर चल रहा मरम्मत का काम; तस्वीरों से खुलासा
पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा क्षतिग्रस्त भोलारी एयरबेस के हैंगर की मरम्मत कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि 10 मई, 2025 को हुए हमले में तबाह हुए इस हैंगर का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। यह हैंगर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट का ठिकाना माना जाता था।
09 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली ; पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए, जिसके निशान भी मौजूद हैं। आतंकी देश अभी भी इन जख्मों पर मरहम लगा रहा है। इसकी गवाही सैटेलाइट तस्वीरें दे रही हैं। इन तस्वीरों से पता चलता है कि भोलारी एयरबेस पर मौजूद हैंगर अब ठीक किया जा रहा है।
यह वही हैंगर है जिसे 10 मई, 2025 को भारतीय वायुसेना के हमले में पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। यह हमला उस समय हुआ था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच 88 घंटे तक चला सैन्य टकराव अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया था।
सैटेलाइट तस्वीरों में कैद पाकिस्तान की तबाही
भारतीय वायुसेना का मानना है कि इसी हैंगर में पाकिस्तान का अहम एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट मौजूद था। शायद यह SAAB 2000 ‘एरीआई’ सिस्टम वाला विमान था। ताजा तस्वीरों में दिख रहा है कि हैंगर की हरी छत वाला बड़ा हिस्सा हटा दिया गया है। कुछ हिस्से उखड़े हुए दिख रहे हैं।
यह तैयारी या शुरुआती चरण के पुनर्निर्माण के काम का संकेत देता है और यह भारतीय वायुसेना द्वारा हमला किए गए अन्य ठिकानों पर पाकिस्तानी मरम्मत गतिविधियों के अनुरूप है। पूरी मरम्मत में शायद नई छत लगाना, ढांचे को मजबूत करना और सारा मलबा हटाना शामिल होगा। नई तस्वीर से पता चलता है कि ढांचा छोड़े जाने के बाद से कुछ प्रगति हुई है।
भोलारी हैंगर पर कब हुआ था हमला?
भोलारी के हैंगर पर 10 मई, 2025 को सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच हमला किया गया। हालांकि एयरफोर्स ने उस हथियार का नाम नहीं बताया जिसका इस्तेमाल भोलारी पर हमले में किया गया। हालांकि माना जाता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान IAF ने कई तरह के एयर-टू-सरफेस हथियारों का इस्तेमाल किया था।
इससे पहले भी पाकिस्तान के दूसरे सैन्य ठिकानों पर ऐसे ही मरम्मत कार्य देखे जा चुके हैं। मुरिद एयरबेस में टूटे भवन की छत को लाल तिरपाल से ढका गया था। सुक्कुर में ड्रोन हैंगर नष्ट हुआ था। नूर खान एयरबेस पर कमांड और कंट्रोल सेंटर को नुकसान पहुंचा था। भोलारी का यह हैंगर भी उन्हीं ठिकानों में शामिल था जिन पर भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमला किया था।
दैनिक जागरण
ऑपरेशन सिंदूर की टीस: भारत से सस्ते टीके न मिल पाने से कराह रहा पाकिस्तान, खरीदने के लिए नहीं है धन
ऑपरेशन सिंदूर की मार पाकिस्तान को अब भी रह-रहकर टीस दे रही है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से पाकिस्तान को मिलनेवाली सस्ते टीकों की खेप पर रोक लगने से पाकिस्तान की आर्थिक हालत चरमरा गई है।
कराची। ऑपरेशन सिंदूर की मार पाकिस्तान को अब भी रह-रहकर टीस दे रही है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से पाकिस्तान को मिलनेवाली सस्ते टीकों की खेप पर रोक लगने से पाकिस्तान की आर्थिक हालत चरमरा गई है।
बता दें कि दुनिया के सबसे गरीब देशों के बच्चों को टीके उपलब्ध कराने के लिए काम करने वाली एक वैश्विक सार्वजनिक-निजी स्वास्थ्य साझेदारी ‘ग्लोबल अलायंस फार वैक्सीन्स एंड इम्यूनाइजेशन (जीएवीआइ)’ के माध्यम से पाकिस्तान को भारत से सस्ते टीके मिलते थे। बेहद तनावपूर्ण माहौल में भी ये सप्लाई कायम रहती थी।
पाकिस्तान सरकार अपने नागरिकों को 13 तरह के टीके निशुल्क लगवाती है, लेकिन इनमें से एक भी पाकिस्तान में नहीं बनता। कमाल ने बताया कि फिलहाल, पाकिस्तान 40 करोड़ डालर के टीके सालाना आयात करता है, जिसका लगभग 49 प्रतिशत लागत भार जीएवीआइ का संचालन करनेवाला अंतरराष्ट्रीय संगठन वहन करता है। वहीं पाकिस्तान पर 51 प्रतिशत लागत भार पड़ता है।
कमाल ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर टीकों का उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो 2031 तक सालाना आयात बिल 1.2 अरब डॉलर तक जा पहुंचेगा।
उन्होंने ये भी कहा कि 2031 के बाद टीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी नहीं मिलेगा। दुनिया की पांचवी बड़ी आबादी वाला देश पाकिस्तान में सालाना 62 लाख बच्चे जन्म लेते हैं। ऐसे में टीकों की मांग तेजी से बढ़नेवाली है।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 भारतीयों के मारे जाने की प्रतिक्रिया स्वरूप भारत ने सात मई को पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में स्थित आतंकी संगठनों के ठिकानों पर हमले के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम की गुहार पर 10 मई को हमले रोके गए थे।