अब दुनिया से लगा रहा ये गुहार
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित कर पाकिस्तान को रणनीतिक झटका दिया। ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अंदर तक हिल गया, जो अब संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गुहार लगा रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल बंद होने तक सामान्य संबंध संभव नहीं। पाकिस्तान को अपने आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा।
21 जनवरी, 2026 – नई दिल्ली : पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि के निलंबन का फैसला भारत का एक अहम रणनीतिक कदम था। पाकिस्तान ने भारत की ओर से सालों से इस तरह के डिप्लोमैटिक और पॉलिटिकल कदमों को नहीं देखा था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पहले तो सिंधु जल संधि को रोक दिया और फिर ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को अंदर तक हिला दिया।
भारत ने जब से सिंधु जल संधि को रोका है, पाकिस्तान अपने राजदूतों को बुला रहा है, यूएन को अर्जेंट लेटर लिख रहा है, दुनिया की राजधानियों में डेलीगेशन भेज रहा है और हर मुमकिन इंटरनेशनल फोरम को एक्टिव कर रहा है।
भारत के प्रहार से छटपटा रहा पाकिस्तान
भारत के इस कदम से पाकिस्तान में किस कदर छटपटा रहा है कि इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नौ महीने से भी कम समय में आठ हाई लेवल विदेशी दौरे, आठ बड़ी इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस, दस से ज्यादा कानूनी कार्रवाई और सात घरेलू पॉलिटीकल लामबंदी। मैसेज साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के सबसे सेंसिविट प्रेशन प्वाइंट पर प्रहार किया है।
23 अप्रैल 2025 के हमले का बाद भारत ने 1960 के बाद पहली बार औपचारिक तौर पर सिंधु जल संधि के भविष्य पर पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को सरकारी पॉलिसी के टूल के तौर पर लगातार इस्तेमाल करने से जोड़ा। संदेश साफ था कि सामान्य सहयोग असामान्य दुश्मनी के साथ नहीं रह सकता।
पाकिस्तान को लगा गहरा झटका
सिंधु जल संधि पर रोक पाकिस्तान के लिए गहरा झटका था। पूरा पाकिस्तान लगभग सिंधु नदी पर निर्भर है। इसकी लगभग 80 से 90 फीसदी खेती इसी के पानी पर निर्भर है। भारत के एक्शन के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने पानी को जरूरी राष्ट्रीय हित घोषित कर दिया और चेतावनी दी कि इसमें किसी भी प्रकार की रुकावट को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।
दुनिया से गुहार लगा रहा पाकिस्तान
इंटरनेशनल लेवर पर, पाकिस्तान के इस मुद्दे को कई मंचों पर उठाया और पूरा कैंपेन चलाया। यूएनएससी, यूएनजीए, ओआईसी, एससीओ और ग्लेशियर कॉन्फ्रेंस या वर्ल्ड बैंक कोई भी फोरम ऐसा नहीं बचा कि जहां पाकिस्तान ने अपना रोना न रोया हो। पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स ने पानी का हथियार बनाना जैसे बैनर तले खास इवेंट भी किए।
आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी का हथियार बनाना छोड़े पाकिस्तान- भारत
पाकिस्तान ने हेग में भी गुहार लगाई है, लेकिन भारत का कहना है कि ट्रीटी रोक दिया गया है। पाकिस्तान को भरोसे के साथ और पक्के तौर पर अपने टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना होगा और आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी का हथियार बनाना छोड़ना होगा। भारत की ओर से यह मांग यूं ही नहीं आई है। मुंबई 1993 के ब्लास्ट से लेकर 26/11, उरी, नगरोटा, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम तक, पाकिस्तान-बेस्ड ग्रुप्स से जुड़े दशकों पुराने हमलों के बाद आई है।
इसके बाद भी टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर खत्म करने के बजाए, पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े फ्रंट्स की कई पब्लिक रैलियां, जैश-ए-मोहम्मद की खुली भर्ती और यहां तक कि महिला विंग का भी खुलासा हुआ है। ये सब बातें ऑपरेशन सिंदूर के महीनों बाद सामने आई हैं।
दैनिक जागरण