11 मार्च, 2026 – नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बावजूद भारत में तेल और गैस की कमी नहीं होगी। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 100 प्रतिशत गैस सप्लाई पक्की की है। भारत अब दूसरे देशों से भी गैस खरीद रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी जरूरतों के लिए सिर्फ मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं है। भारत अलग-अलग देशों और रास्तों से तेल और गैस की सप्लाई पक्की कर रहा है।
मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत का ऊर्जा आयात लगातार जारी है और सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार ने ऐसे कदम उठाए हैं जिससे युद्ध के बावजूद आम लोगों को गैस की कमी न हो। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी जानकारी दी कि भारत का ऊर्जा आयात बिना किसी रुकावट के चल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए CNG और PNG की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही, युद्ध की स्थिति के बावजूद अन्य उद्योगों को भी उनकी जरूरत के अनुसार लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति जारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार सस्ती और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए मध्य-पूर्व के बाहर के देशों से अतिरिक्त द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कार्गो भी खरीद रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति शृंखला में संभावित बाधाओं के बावजूद देश में ऊर्जा उपलब्धता को स्थिर बनाए रखना है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता है, क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसी बीच अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। अमेरिका का कहना है कि इससे मौजूदा संकट के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
अमर उजाला