प्रति एकड़ की आमदनी को जानकर उड़ जाएंगे होश
फरीदकोट के 27 वर्षीय किसान गुरजोत सिंह बैंगनी आलू की खेती से असाधारण मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने 2022 में बोलीविया से बीज आयात कर इसकी शुरुआत की। अब वे 45 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं, जिससे प्रति एकड़ 6 से 20 लाख रुपये तक की आय हो रही है।
13 मार्च, 2026 – फरीदकोट : पंजाब के फरीदकोट जिले के छोटे से गांव मत्ता का 27 वर्षीय किसान गुरजोत सिंह एक अलग किस्म के बैंगनी रंग के आलू (पर्पल पटोटो) की खेती करके आम किसानों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहा है। जिसके चलते गुरजोत अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गया है।
उल्लेखनीय है कि लॉ ग्रेजुएट गुरजोत सिंह का परिवार पिछले लगभग 25 वर्षाें से आलू की खेती कर रहा है। परंतु लगभग चार वर्ष पूर्व गुरजोत ने दिल्ली और चंडीगढ़ के प्रीमियम रिटेल स्टोरों में विदेश से इंपोर्ट होकर आया यह बैंगनी आलू देखा। वहां यह आलू 250 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे थे। जिसके पश्चात उसने इसकी खेती करने की सोची परंतु जब इसके बारे में जानकारी जुटाई तो यहां बीज नहीं मिला।
जिसके चलते उसके द्वारा 2022 में बोलीविया से लगभग 20 किलो बीज आयात किया गया। ताकि वह इस आलू की बिजाई करके परीक्षण कर सके कि क्या यह फसल पंजाब की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हो सकती है। उपरांत उसका यह अनुभव सफल रहा। जिसके पश्चात उसने लगातार इसकी खेती करनी शुरू कर दी और वर्तमान में वह 45 एकड़ में इस बैंगनी रंग के आलू की खेती कर रहा है। इसके अतिरिक्त उसके द्वारा वर्तमान में कुछ अन्य किस्म के आलू की वरायटी जैसे पिंटो गोल्ड, एस्मी, इस्मायल और मरियम आदि की खेती भी शुरू की गई है।
क्या बोले गुरजोत सिंह?
इस बारे में बात करते हुए गुरजोत सिंह बताते हैं कि आम आलू और इस बैंगनी आलू की फसल की लागत लगभग एक जैसी ही है। परंतु इस बैंगनी रंग के आलू का उत्पादन जहां प्रति एकड़ आम आलू की तुलना में दो गुना है वहीं इसका रेट भी आम आलू की तुलना में लगभग 7 गुना मिल रहा है। जिसके चलते प्रति एकड़ लगभग 200 क्विंटल आलू के उत्पादन से वे रेट के अनुसार 6 से 20 लाख रूपये की कमाई कर रहे हैं।
जो आम रिवायती फसलों की तुलना में बहुत अधिक है। उनके अनुसार वर्तमान में जहां सामान्य आलू 6 से 7 रूपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं उनका बैंगनी आलू 30 रूपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
गुरजोत ने बताया कि 2024 में भारत सरकार द्वारा भी इस आलू को कुफरी जामनिया के नाम से लांच किया गया है। उन्होंने बताया कि यह वास्तव में बोलीविया की फसल है और वहां इसे ब्लू कांगो कहा जाता है। इस आलू की शेल्फ लाइफ बहुत है। हार्ड शेल का आलू है इसलिए क्रेक नहीं आता। इसके अतिरिक्त इसमें शूगर नहीं और कैलोरी बहुत कम। जिसके चलते यह ब्लड शूगर के लिए भी लाभादायक और नर्वस सिसटम के लिए बहुत बढ़िया है।
गौरतलब है कि इस बैंगनी रंग के बालू को मेडिसिन पटोटो कहा जाता है क्योंकि इसमें एंथोसायनिन होता है जो इसे पर्पल रंग देता है। इसमें ऐटी आक्सीडेंटस बड़ी मात्रा में होते हैं। जिसके चलते जहां यह कैंसर की बीमारी में लाभदायक होता है वहीं अन्य बीमारियों को भी रोकता है।
इस संबंध में बात करते हुए होर्टिकल्चर डेवलपमेंट अधिकारी डा. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। हालांकि यह पीएयू की प्रवानित वैरायटी नहीं है। परंतु इससे किसान अच्छा खासा लाभ कमा सकते हैं तथा फसली चक्र से भी बाहर निकल सकते हैं। क्योंकि इसकी मांग काफी अधिक है और अभी हमारे क्षेत्र में इसका उत्पादन न के बराबर हो रहा है।
दैनिक जागरण