किस बात का सता रहा डर?
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से खालिस्तान समर्थक चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि इससे भारत को उन पर कार्रवाई करने का अधिक अधिकार मिलेगा। SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इसे “मुक्त अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौता” बताया। खुफिया ब्यूरो के अनुसार, ऐसे बयान विदेश में भारतीयों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता खालिस्तानी समूहों के लिए स्थिति और खराब करेगा, क्योंकि दोनों पक्ष आतंकवाद पर सहयोग करेंगे।
29 जनवरी, 2026 – नई दिल्ली : भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद खालिस्तान समर्थकों में खलबली मच गई है।
उनका मानना है कि यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच घनिष्ठ संबंधों से भारत को खालिस्तान समर्थकों को निशाना बनाने का अधिक अधिकार मिल गया है।
भारत-ईयू समझौते से खालिस्तान समर्थकों में गहरी चिंता
खालिस्तान समर्थक, जिन्होंने कनाडा, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों को अपना आधार बनाया है, मानते हैं कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह निकटता उन्हें नुकसान पहुंचाएगी।
बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और सिख्स फार जस्टिस (SFJ) जैसे समूहों को यूरोप की सरकारों द्वारा नरम रुख अपनाने का भरपूर फायदा मिला है।
गुरपतवंत पन्नू ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौता’ कहा
इन समूहों में व्याप्त भय एसएफजे प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के बयान से स्पष्ट है। उसने कहा, ‘यूरोपीय संघ आज जिस मुक्त व्यापार समझौते का जश्न मना रहा है वह एक मुक्त अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौते की ओर ले जाएगा।’
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि एक ओर समझौते के कारण दहशत फैली हुई है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयान जारी करने का उद्देश्य यूरोपीय देशों में रहने वाले भारतीयों के प्रति हिंसा और घृणा को भड़काना है।
आतंकवाद पर भारत-ईयू सहयोग से खालिस्तानियों पर दबाव
वे अपने समर्थकों को इन देशों में रहने वाले भारतीयों को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा इन समूहों के आतंकवादी स्वरूप के बारे में पर्याप्त सुबूत उपलब्ध कराने के बाद ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों ने इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते से उनके लिए स्थिति और भी खराब हो गई है, क्योंकि दोनों पक्षों ने आतंकवाद से संबंधित मामलों पर सहयोग करने और मिलकर काम करने का भी फैसला किया है।
दैनिक जागरण