AAP सरकार ने ऊर्जा निगम की संपतियां बेचनी चाही तो अदालत ने लगाई रोक
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने PSPCL की सार्वजनिक संपत्तियों की बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। जनहित याचिका में आरोप- सरकारी विभागों पर 2582 करोड़ बिजली बकाया और 10 हजार करोड़ सब्सिडी लंबित, संपत्ति बेचना जनहित के खिलाफ।
25 फरवरी, 2026 – पंजाब राज्य ऊर्जा निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी विभागों पर लंबित भारी बिजली बकाया की भरपाई के लिए निगम की परिसंपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह ने बताया कि अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल बकाया 2,582 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त बिजली सब्सिडी के मद में राज्य सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है।
क्या है आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस वित्तीय दबाव को संतुलित करने के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है जो जनहित के प्रतिकूल है। सर्वाधिक बकाया वाटर सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग पर है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जब स्वयं सरकारी विभाग नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तब सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियां बेचकर घाटा पूरा करना अनुचित और विधि-विरुद्ध है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से मांग की कि डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटे जाने के निर्देश दिए जाएं तथा राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए। साथ ही, ऊर्जा निगम की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की भी प्रार्थना की गई।
पांचजन्य