RSS की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने यूजीसी रेगुलेशन से लेकर ट्रेड डील जैसे हर मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा है। उन्होंने बताया है कि 100 साल होने के बावजूद संघ के कार्य अभी अधूरे हैं और उसे कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
20 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली/लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) इसके शताब्दी वर्ष पर देश-विदेश में अपने विचारों को विस्तार देने के अभियान में जुटा हुआ है। इसकी कमान खुद RSS चीफ या सर संघचालक मोहन भागवत ने संभाल रखी है। बुधवार को उन्होंने लखनऊ में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में समाज के लोगों से तकरीबन ढाई घंटे तक बातचीत की। इस कार्यक्रम में उन्होंने संघ के विचारों के बारे में भी बताया और लोगों के सवालों के सहजता से उत्तर भी दिए। मोटे तौर पर सात ऐसे सम-सामयिक और राजनीति मुद्दे हैं, जिन पर भागवत ने RSS की सोच को लोगों के सामने रखा।
टैरिफ युद्ध पर क्या बोले RSS चीफ
मोहन भागवत का कहना है कि टैरिफ को लेकर हाल में भारत को जो संघर्ष करना पड़ा है, उससे इसे ग्लोबल साऊथ की अगुवाई करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। संघ प्रमुख ने भरोसा जताया है कि ‘टैरिफ युद्ध से हमें नुकसान नहीं होगा। हमें कोई देश नहीं दबा सकेगा, हम मजबूती से डटे रहेंगे। कुछ दिनों में सबकुछ सामान्य हो जाएगा।’ वह अमेरिका की ओर से पहले 50% टैरिफ लगाए जाने और फिर ट्रेड डील की घोषणा के बाद इसे घटाकर 18% किए जाने पर बोल रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘भारत नहीं झुकेगा।’
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या बोले मोहन भागवत
मोहन भागवत का कहना है कि ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पूजीवांदियों और बैंकों के हाथों में नहीं है, बल्कि यह हमारे घरों में है। भारत में वह शक्ति है कि वह दबाव झेलकर प्रगति गर सकता है।’उन्होंने कहा कि ताकतवर देशों का यह पुराना तरीका रहा है कि वह आर्थिक फायदे और हथियारों के दम पर दूसरों को दबाने की कोशिश करते हैं।
यूजीसी विवाद पर मोहन भागवत ने क्या कहा
यूजीसी रेगुलेशन पर जारी विवाद पर मोहन भागवत का कहना है कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। इसलिए संघ का कोई भी स्टैंड इसके निर्णय पर निर्भर करेगा। अभी सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित रेगुलेशन पर रोक लगा रखी है।
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर
देश भर के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति का मुद्दा भी बड़ा राजनीतिक विषय है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण इसके बड़े पैरोकार हैं। देश में अन्य वर्गों से भी यह मांग लगातार उठ रही है। इसपर मोहन भागवत ने कहा है कि ‘हमारी भी मांग है कि मंदिरों का नियंत्रण श्रद्धालुओं के हाथों में सौंपा जाए।’ उनका कहना है कि धार्मिक नेता और आम लोग मंदिरों का मिल-जुलकर प्रबंधन करें।
RSS की अधूरी सफलता की वजह क्या है
RSS प्रमुख ने लोगों से अनुरोध किया है कि बिना संघ में शामिल हुए, इसे जज करने की कोशिश न करें। उन्होंने राष्ट्रहित में हिंदुओं को एकजुट होने की अपील की। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में RSS ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, लेकिन यह भी माना है कि इसका मिशन अभी भी अधूरा है। उन्होंने कहा, ‘संघ ने बहुत काम किया है, लेकिन इसे पूर्ण सफलता नहीं मिली है, क्योंकि हिंदू समाज एकजुट नहीं है।’
RSS की सबसे बड़ी समस्या क्या है
प्रश्न-उत्तर के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत को इस सवाल का भी सामना करना पड़ा कि RSS की सबसे बड़ी समस्या क्या है। इसपर उन्होंने कहा, ‘हिंदू समुदाय सभी मुद्दों पर उदासीन है।’ उनका कहना है कि ‘भिन्न-भिन्न जातियों और पंथों से अपनी पहचान बनाने की जगह, हिंदू के तौर पर अपनी पहचान बनाना हम सभी के लिए बेहतर है। सामाजिक सौहार्द समाजिक एकता का आधार है।’ उनके अनुसार, ‘जाति व्यवस्था धीरे-धीरे मिट रही है। युवा पीढ़ी में यह व्यवहार दिख रहा है।’ ‘जिस दिन समाज में जाति का महत्त्व नहीं रहेगा, जाति की राजनीति करने वाले नेता भी बदल जाएंगे।’
बीजेपी और RSS के रिश्ते पर क्या बोले भागवत
मोहन भागवत ने लंबे समय से लगने वाले इन आरोपों को खारिज किया है कि बीजेपी का रिमोट कंट्रोल संघ के हाथों में होता है। उनका कहना है कि यह एक राजनीतिक संगठन है, जो स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। उन्होंने बताया, ‘स्वयंसेवक बीजेपी में जा सकते हैं और प्रगति कर सकते हैं, लेकिन यह कहना कि संघ पार्टी को कंट्रोल करता है, गलत है।’
नवभारत टाइम्स