मोहन भागवत ने छत्रपति संभाजीनगर में युवाओं से कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए विदेश जाने में संकोच न करें। उन्होंने जोर दिया कि अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र के हित में होना चाहिए। भागवत ने कहा कि आज के युवा देशभक्त हैं, जिनकी भावना देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने बताया कि आरएसएस का उद्देश्य एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है।
17 जनवरी, 2026 – नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि युवाओं को ज्ञान प्राप्त करने के लिए विदेश जाने में संकोच नहीं करना चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र के हित में हो।
छत्रपति संभाजीनगर के दो दिवसीय दौरे पर आए भगवत ने कहा कि आज के युवा देशभक्त हैं और यह भावना जितनी मजबूत होगी, वे देश के विकास में उतना ही अधिक योगदान दे सकेंगे।
उन्होंने एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए विदेश जाना गलत नहीं है, लेकिन उस ज्ञान का उपयोग भारत के हित में होना चाहिए।
युवाओं की देशभक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी
देश की प्रगति और भविष्य के निर्माण में युवाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि कई लोग पिछले 100 वर्षों से आरएसएस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र के हित में हो।
भागवत ने कहा कि संघ न तो किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में है और न ही किसी का विरोध करता है, और इसका एकमात्र उद्देश्य एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है।
दैनिक जागरण