कहा-चीफ सेक्रेटरी हलफनामा दाखिल करें, वरना होगी कार्रवाई
10 जनवरी, 2026 – चंडीगढ़ : याचिकाकर्ता हरमीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर में दो पूर्व मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों और उनके निजी सहायकों के खिलाफ मामले की जांच शुरू की गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंचाई घोटाले से संबंधित अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने में हो रही देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह अगले सप्ताह तक मुख्य सचिव के माध्यम से हलफनामा दाखिल करे जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि अभियोजन स्वीकृति पर अब तक क्यों कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो दमनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला सिंचाई घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें पंजाब सरकार पर आरोप था कि वह जानबूझकर मामले की जांच को धीमा कर रही है। याचिकाकर्ता हरमीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। 17 अगस्त 2017 को दर्ज एफआईआर में दो पूर्व मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों और उनके निजी सहायकों के खिलाफ मामले की जांच शुरू की गई थी लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जानबूझकर मामले की प्रगति में देरी कर रही सरकार
हाईकोर्ट ने 14 जुलाई 2021 को दिए गए अपने आदेश को लेकर भी नाराजगी जताई, जिसमें इस मामले में किसी भी प्रकार के अभियोजन स्वीकृति पर फैसला नहीं लिया गया था। उस समय अदालत को बताया गया था कि 14 चालान ट्रायल कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं लेकिन अभियोजन स्वीकृति पर फैसला अब तक लंबित है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट किया कि वह जानबूझकर मामले की प्रगति में विलंब कर रही है ताकि उच्च अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों को बचाया जा सके। अदालत ने इस मामले में एक बार फिर जनहित याचिका को बहाल करने के निर्देश दिए।
अमर उजाला