’22 मिनट में ही हिल गया था पाकिस्तान’, 8 आतंकी कैंप अब भी एक्टिव
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी रहने की बात दोहराते हुए पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि सीमा पार 8 आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं, जिनमें लगभग 150 आतंकवादी मौजूद हैं। द्विवेदी ने कहा कि किसी भी उकसावे पर भारत सख्त कार्रवाई करेगा। चीन सीमा पर स्थिति स्थिर है, लेकिन निगरानी जारी रहेगी। उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया।
14 जनवरी, 2026 – देश की सीमाओं पर दोहरी सामरिक चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता जताते हुए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर जारी रहने की बात दोहराते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया कि सीमा पार से अगर कोई भी उकसावे की हरकत हुई तो भारत सख्त कार्रवाई करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान द्वारा अब भी संचालित किए जा रहे आठ आतंकी कैंपों के मद्देनजर यह चेतावनी दी जहां करीब 150 आतंकवादियों के मौजूद होने का अनुमान है।
साथ ही उम्मीद जताई कि पाकिस्तान ऐसी हिमाकत नहीं करेगा क्योंकि उसे मालूम है कि आगे किसी तरह के दुस्साहस का भारत कैसे जवाब देगा जैसाकि ऑपेरशन सिंदूर के दौरान हुआ था जब 10 मई को भारतीय सेनाओं ने परंपरागत जमीनी सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली थी।
वहीं चीन से लगी उत्तरी सीमा के हालातों को स्थिर करार देते हुए सेना प्रमुख ने इस पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई और कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती संतुलित है तथा इसमें फिलहाल कोई कमी नहीं होगी।
सेना दिवस के पूर्व मंगलवार को अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब देते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के 88 घंटे के ऑपेरशन सिंदूर का दूसरा निर्णायक पल 10 मई की सुबह थी जब हमें उपर से ऐसे निर्देश थे कि पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस करने की कोशिश की तो आगे के जमीनी ऑपरेशन शुरू करने हैं जिसके लिए हमारी तीनों सेनाएं पूरी तरह तैयार थीं।
जनरल द्विवेदी ने खुलासा किया कि सीमाओं पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर भारत ने पाकिस्तान में पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के दायरे को काफी बढ़ा दिया था।
भारतीय नौसेना के जहाजों से लेकर भारतीय वायुसेना के मूवमेंट को सेटेलाइलट के जरिए वे भांप रहे थे और उन्हें आभास हो गया कि आगे लड़ाई बढ़ी तो मुश्किल होगा। इसीलिए पाकिस्तान के डीजीओएमओ ने 10 मई की सुबह साढे नौ बजे हमारे डीजीएमओ से संपर्क कर कहा कि लड़ाई को रोकना ही उचित होगा।
पिछले साल सात मई से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पार से आतंकी हमले लगभग खत्म हुए हैं पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तैनाती में कोई कमी नहीं आयी है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा तथा एलओसी के पार आठ आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं जिनमें लगभग 150 आतंकवादी हैं।
इन कैंपों में ट्रेनिंग गतिविधि जैसी कुछ सक्रियता है जिस पर हमारी पूरी नजर है और इनपुट जुटा रहे हैं। कोई दुस्साहस किया गया तो कड़ी जवाबी कार्रवाई करेंगे।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में पश्चिमी मोर्चे पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई मगर पिछले साल 10 मई से पूरी तरह नियंत्रण में है और 2025 में कुल 31 आतंकवादियों मार गिराया गया जिनमें 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। इसमें तीन आतंकी पहलगाम आतंकवादी हमले के गुनगहार थे जिन्हें ऑपरेशन महादेव के दौरान मारा गया।
उनके अनुसार जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकवादियों की संख्या अब सिंगल डिजिट में आ गई है और नई भर्ती लगभग न के बराबर है।
सेना प्रमुख ने चीन पर क्या कहा?
चीन से लगी उत्तरी सीमा के हालात को स्थिर मगर लगातार निगरानी के लिए जरूरी बताते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर की बातचीत, नए सिरे से संपर्क और विश्वास बहाली के उपायों से स्थिति को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद मिल रही है। रणनीतिक दृष्टि से एलएसी पर सैनिकों की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है और क्षमता विकास तथा इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाने का काम भी चल रहा है।
21 अक्टूबर 2024 को जो समझौता हुआ था उसे पूरा कर लिया गया है। आगे के समाधान के लिए सैन्य, कूटनीतिक तथा शीर्ष राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है। उतरी सीमा से सैनिकों की तैनाती घटाने के सवाल पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि रणनीतिक संतुलन बनाए रखने को देखते हुए अभी तैनाती में कमी की योजना नहीं है।
शक्सगाम घाटी में चीन-और पाकिस्तान के सहयोग पर उन्होंने विदेश मंत्रालय के रूख को दोहराते हुए कहा कि यह अवैध है क्योंकि यह हमारा क्षेत्र है।
बांग्लादेश पर सेना प्रमुख ने क्या कहा?
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की पाकिस्तान के साथ निकटता बढ़ाने की चुनौती से जुड़े सवाल पर सेना प्रमुख ने कहा कि वहां की तीनों सेनाओं के शीर्ष स्तर से हमारा निरंतर संपर्क-संवाद है और वे किसी प्रकार भारत के खिलाफ नहीं। अंतरिम सरकार चार-पांच महीने रहेगी और इसके बाद नई सरकार आएगी तो स्थिति का आकलन करेंगे।
जनरल द्विवेदी ने इस दौरान सेना की सामरिक जरूरतों तथा चुनौतियों को देखते हुए आधुनिकीकरण से लेकर हथियारों की आपूर्ति में तेजी लाने, रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने तथा रक्षा आत्मनिर्भरता की अपनी प्राथमिकताएं भी बताई।
दैनिक जागरण