आम चुनाव से पहले दहशत में पत्रकार, सरकार से मांगी सुरक्षा
20 जनवरी, 2026 – ढाका : बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी है। दो और हिंदुओं की हत्या का मामला सामने आया है। आम नागरिकों के अलावा ‘डेली स्टार’ और ‘प्रोथोम आलो’ अखबारों पर भी हमले हुए हैं। पत्रकारों और संपादकों ने चिंताजनक माहौल का संज्ञान लेने की अपील करते हुए सरकार से सुरक्षा मांगी है।
बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की वारदातें थम नहीं रही हैं। पिछले दो दिनों में दो अलग-अलग जिलों से दो हिंदुओं की हत्या कर दी गई। उन्मादी लोगों ने एक को पीट-पीट कर मार डाला, जबकि दूसरे को गाड़ी से कुचल कर मार डाला गया। हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक महीने में इस पड़ोसी मुल्क में आठ हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है।हिंसा के कारण हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश है।
होटल कर्मचारी से कहासुनी के बाद मारपीट
पहली वारदात, बांग्लादेश के गाजीपुर जिले में शनिवार को हुई। यहां हिंदू कारोबारी लिटन चंद्र घोष उर्फ काली (55) की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। लिटन इलाके में बोयीशाखी स्वीट एंड होटल चलाते थे। स्थानीय पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11 बजे मासूम मिया (28) होटल पहुंचा। उसकी किसी बात को लेकर होटल कर्मचारी अनंत दास (17) से कहासुनी हो गई और जल्द ही कहासुनी मारपीट में बदल गई। थोड़ी देर बाद मासूम मिया के माता-पिता मोहम्मद स्वपन मिया (55) और मजीदा खातून (45) पहुंचे और झगड़े में शामिल हो गए।
सिर पर फावड़े से हमला, मौके पर ही हुई मौत; हिंसा के तीन आरोपी पुलिस के हवाले
लिटन ने जब बीच-बचाव कर अपने कर्मचारी को बचाने की कोशिश की तो हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लिटन के सिर पर फावड़े से हमला किया। पुलिस के अनुसार, चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साएं स्थानीय लोगों ने तीनों आरोपियों मोहम्मद, मजीदा और मासूम को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस का कहना है मामले की जांच जारी है।
बांग्लादेश में क्यों चिंताजनक हैं हालात?
- अगस्त, 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा।
- युवाओं के आक्रोश के बीच राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा भारत का पड़ोसी।
- शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार।
- यूनुस सरकार ने बीते दिनों कहा- देश में 12 फरवरी, 2025 को होंगे आम चुनाव।
- चुनाव की घोषणा के बाद भी नहीं थम रहा नागरिक असंतोष।
- बीते कुछ हफ्ते में बढ़े धार्मिक उन्माद और हिंसा के बीच अल्पसंख्यकों पर हमले कर रहे चरमपंथी लोग।
- पड़ोसी मुल्क में 18 दिसंबर से अब तक 8 हिंदुओं की हत्या।
- भारतीय विदेश मंत्रालय हालात पर रख रहा करीबी नजर
पेट्रोल के पैसे मांगे तो गाड़ी से कुचला
दूसरी घटना, राजबाड़ी जिले में हुई। पुलिस अधिकारियों के हवाले से द डेली स्टार अखबार ने बताया कि हिंदू युवक रिपन साहा (30) एक पेट्रोल पंप पर काम करता था। शुक्रवार को घटना के समय वह गोआलंदा मोर स्थित करीम फिलिंग स्टेशन पर तैनात था। पुलिस और चश्मदीदों के मुताबिक, शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे एक काली एसयूवी फिलिंग स्टेशन पर आई और करीब 5,000 टका (लगभग 3,710 रुपये) का पेट्रोल भरवाया। जब ड्राइवर बिना पैसे दिए जाने लगा तो साहा ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इस पर ड्राइवर ने रिपन पर गाड़ी चढ़ा दी और तेजी से भाग गई। कुचले जाने पर साहा की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में पुलिस ने गाड़ी जब्त कर ली और उसके मालिक अबुल हाशेम उर्फ सुजान (55) और ड्राइवर कमाल हुसैन (43) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि हाशेम राजबाड़ी जिले की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के पूर्व कोषाध्यक्ष और जिले के जुबो दल के पूर्व अध्यक्ष हैं तथा पेशे से ठेकेदार हैं।
पत्रकारों ने सरकार से सुरक्षा मांगी
इसके अलावा शनिवार को पत्रकारों, संपादकों और मीडिया आउटलेट्स मालिकों ने भी हिंसा को लेकर चिंता जताते हुए अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की। यह मांग हाल ही में देश के दो सबसे बड़े अखबारों पर भीड़ के हमलों के बाद उठी है। उनका कहना है कि नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में मीडिया इंडस्ट्री को योजना बनाकर निशाना बनाया जा रहा है। प्रशासन राजधानी ढाका में स्थित प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘डेली स्टार’ और सबसे बड़े बंगाली अखबार ‘प्रोथोम आलो’ पर हुए हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा।
क्या है मामला?
दिसंबर में एक इस्लामी कार्यकर्ता की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने इन दोनों अखबारों के दफ्तरों पर हमला कर दिया था और आग लगा दी थी। इस दौरान पत्रकार और कर्मचारी अंदर ही फंस गए थे। अखबार के अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने भीड़ को हटाने के लिए बार-बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस या प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। घंटों बाद ‘डेली स्टार’ की छत पर फंसे पत्रकारों को बचाया जा सका। इमारतों में लूटपाट भी की गई। जब एडिटर्स काउंसिल के एक नेता वहां पहुंचे, तो हमलावरों ने उनके साथ भी बदसलूकी की। उसी दिन ढाका में कुछ सांस्कृतिक केंद्रों पर भी हमले हुए थे।
यह अभी साफ नहीं है कि प्रदर्शनकारियों ने इन अखबारों पर हमला क्यों किया, क्योंकि इनके संपादकों को यूनुस का करीबी माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से इस्लामी समूह इन अखबारों के दफ्तरों के बाहर विरोध कर रहे थे और उन पर भारत से संबंध होने का आरोप लगा रहे थे।
बैठक में क्या?
शनिवार को एडिटर्स काउंसिल और अखबार मालिकों ने एक साझा बैठक की। उन्होंने मांग की कि फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले सरकार स्वतंत्र प्रेस की सुरक्षा सुनिश्चित करे। काउंसिल के अध्यक्ष नूरुल कबीर ने कहा कि मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को चुप कराने की कोशिशें एक खतरनाक संकेत हैं। उन्होंने पत्रकारों से एकजुट रहने की अपील की।
अमर उजाला