मिलर्स ने किया पड़ोसी राज्यों का रुख; भारी नुकसान की आशंका
पंजाब में अक्टूबर में खरीदी गई धान की मिलिंग धीमी है, केवल 20% ही हुई है। गोदामों में जगह न होने के कारण एफसीआई ने मिलर्स को पड़ोसी राज्यों में चावल भेजने को कहा है, लेकिन परिवहन खर्च केंद्र सरकार नहीं दे रही। इससे मिलर्स पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने पर धान सूखने से मिलिंग में नुकसान की आशंका है। मिलर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री से मिलने का प्रयास किया।
06 फरवरी, 2026 – चंडीगढ़ : पंजाब में फरवरी महीना शुरू होने के बावजूद अक्टूबर में खरीदी गई 157 लाख टन धान में से मात्र 20 प्रतिशत की मिलिंग हुई है। चार महीने बीतने के बावजूद इतनी धीमी मिलिंग का सबसे बड़ा कारण है कि पंजाब के गोदामों में चावल को स्टोर करने की जगह नहीं है, क्योंकि सभी गोदाम पिछली फसलों को लेकर ही भरे हुए हैं।
चूंकि चावल को खुले में स्टोर नहीं किया जा सकता है, इसलिए एफसीआई ने मिलर्स को राजस्थान, यूपी और जम्मू जैसे पड़ोसी राज्यों में खाली पड़ी कवर्ड स्पेस में अपना चावल भेजने को कहा है, लेकिन इसमें केंद्र सरकार ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस नहीं देगा।
उधर, पंजाब से चावल की धीमी मूवमेंट को लेकर गुरुवार को बीजेपी के प्रधान सुनील जाखड़ की अगुआई में पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ मिलना चाहती थी, लेकिन उनके संसद में व्यस्त होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सिंह सैनी ने बताया कि अब दो-तीन दिन बाद बैठक होगी।
सैनी ने बताया कि कुछ मिलर्स अपने यहां क्षमता से अतिरिक्त धान ले लेते हैं, फिर अपने खर्च पर दूसरे राज्यों में चावल भेज देते हैं। जबकि, चावल भेजने का खर्च केंद्र सरकार देती है। हम यही मसला केंद्रीय मंत्री के पास रखना चाहते थे। राइस मिलर्स की एक और एसोसिएशन के प्रधान भारत भूषण बिंटा ने बताया कि एफसीआई में अनाज को मूव करवाने के मामले में भारी भ्रष्टाचार है। इसीलिए पंजाब से मूवमेंट काफी धीमी है। हमें दूसरे राज्यों में अपने खर्च पर चावल लगाना पड़ रहा है और यह सारा वित्तीय भार मिलर्स पर पड़ रहा है।
पंजाब की खाद्यान्न भंडारण क्षमता 180 लाख टन
गौरतलब है कि पंजाब की कुल खाद्यान्न भंडारण क्षमता लगभग 180 लाख टन है, जिसमें से 120 लाख टन कवर्ड गोदाम हैं और शेष ओपन स्पेस है। इस वक्त सारी की सारी भरी हुई है, जिस कारण मिलिंग का काम काफी धीमा चल रहा है। पंजाब में इस समय 130 लाख टन चावल और 50 टन गेहूं पड़ा हुआ है। मिलर्स को चिंता है कि अक्टूबर 2025 में खरीदी गई 157 लाख टन धान की मिलिंग मात्र 20 प्रतिशत हुई है, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, धान सूखने लगेगा और इसकी मिलिंग करने में टूटन भी बढ़ेगी, साथ ही नमी भी कम होगी। इसमें उनका लाखों रुपये का नुकसान होगा।
दूसरे राज्यों में चावल भेजने की प्रथा गलत: सैनी
पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरसेम सैनी ने मिलर्स की ओर से अपने खर्च पर दूसरे राज्यों में चावल भेजने की प्रथा को गलत बताया। उन्होंने बताया, पंजाब के भीतर परिवहन खर्च एफसीआई द्वारा वहन किया जाता है। उन्होंने कहा, यह प्रथा पूरे बाजार को खतरे में डाल रही है।
दैनिक जागरण