पाकिस्तान में मच गया कोहराम
सिंधु जल संधि को रोकने का फायदा उठाने की भारत की उम्मीद को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। कश्मीर में झेलम और जम्मू में चिनाब पर दो बड़े प्रोजेक्ट में बहुत जल्द हाथ लगने वाले हैं।
12 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली: सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद पाकिस्तान में जो आशंका थी, वह जल्द सही साबित हो सकती है। भारत जल्द ही जम्मू और कश्मीर की दो प्रमुख नदियों झेलम और चिनाब के दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने वाला है। ये प्रोजेक्ट सिंधु जल संधि ( Indus Water Treaty ) की वजह से ही दशकों से लंबित पड़े हैं, लेकिन अब इसपर तेजी से काम शुरू होने वाला है और इससे जम्मू और कश्मीर के लोगों को पानी की बहुत बड़ी समस्या दूर हो सकती है। बता दें कि सिंधु जल संधि के उल्टे-सीधे शर्तों को कायम रखने के लिए पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) तक का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है, लेकिन भारत ने अब उसके पैरों के नीचे की जमीन खींच लेने का ही इंतजाम कर लिया है।
झेलम-चिनाब प्रोजेक्ट पर जल्द शुरू होगा काम
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सिंधु नदी संधि निलंबित होने की वजह से लंबे समय से लंबित जल परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू हो जाएगा। ये प्रोजेक्ट हैं, जम्मू शहर को पानी की सप्लाई देने के लिए चिनाब से पानी उठाना और कश्मीर में झेलम के पानी के प्रबंधन के लिए तुलबुल नेविगेशन बैराज का निर्माण करना।
जम्मू और कश्मीर के लोगों के फायदे का काम
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर विधानसभा को बताया है कि इन प्रोजेक्ट में पहले सिंधु जल संधि की वजह से हाथ लगा पाना मुश्किल था। उन्होंने कहा, ‘हमने यह प्रस्ताव एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) को दिए थे, लेकिन उन्होंने इसकी अनुमति नहीं दी और सिंधु जल समझौते के चलते ये बर्बाद हो गए।’ ‘अब सिंधु जल संधि ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, हम भारत सरकार के साथ दो काम कर रहे हैं- पहला सोपोर के पास झेलम पर तुलबुल नेविगेशन बैराज और दूसरा जम्मू शहर में सप्लाई के लिए अखनूर के पास चिनाब से पानी उठाना।’
पहलगाम हमले के बाद रुक गई सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि में जम्मू और कश्मीर और लद्दाख से नदियों के पानी को पाकिस्तान तक निर्बाध बहाव सुनिश्चित करने की व्यवस्था थी। लेकिन, 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुई जघन्य आतंकवादी वारदात के बाद भारत सरकार ने इस संधि को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया। उमर अब्दुल्ला भी लंबे समय से इस संधि का विरोध ‘सबसे अनुचित समझौता’ कहकर करते रहे हैं, जिसने जम्मू और कश्मीर के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
झेलम पर तुलबुल नेविगेशन बैराज क्या है
तुलबुल नेविगेशन बैराज परियोजना 1980 के दशक के शुरुआत में तैयार की गई। 1984 में इसपर काम भी शुरू हो गया। इसके तहत झेलम नदी के बहाव को रेगुलेट करने के लिए सोपोर में वुलर झील के पास ड्रॉप गेट बनाए जाने थे। इससे नेविगेशन के साथ-साथ बिजली भी मिलनी थी। लेकिन, पाकिस्तान ने अड़ंगा लगाया और 1987 से काम रुक गया।
जम्मू की चिनाब जल आपूर्ति योजना क्या है
जम्मू शहर के लोगों के हित के लिए चिनाब नदी जल आपूर्ति योजना भी बहुत पुराना प्रोजेक्ट है। इसके तहत अखनूर के पास से चिनाब का पानी उठाकर जम्मू शहर और बाहरी इलाके में पानी की सप्लाई करना है। अभी जम्मू शहर के लोगों को तवी नदी का पानी पहुंचाया जाता है, जो बढ़ती मांग की आपूर्ति कर पाने में पूरी तरह से सक्षम नहीं है। इन दोनों प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब सिंधु जल संधि रोकने के भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला ले जाने की योजना बना रहा है।
नवभारत टाइम्स