भारत-अमेरिका डिजिटल कॉरिडोर को दी मजबूती
भारत और अमेरिका द्वारा पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले आयोजित एआइ समिट को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के साथ-साथ यह समझौता आने वाले कई वर्षों तक मजबूत अमेरिकी-भारतीय तकनीकी साझेदारी की नींव रखेगा।
21 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली : गूगल और अल्फाबेट इंक के सीईओ सुंदर पिचाई ने शुक्रवार को कहा कि एआइ का लाभ सभी तक और हर जगह पहुंचाने के लिए अमेरिका और भारत की साझेदारी अहम है।
भारत और अमेरिका द्वारा पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले आयोजित एआइ समिट को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के साथ-साथ यह समझौता आने वाले कई वर्षों तक मजबूत अमेरिकी-भारतीय तकनीकी साझेदारी की नींव रखेगा। पैक्स सिलिका, महत्वपूर्ण खनिजों और एआइ के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
पिचाई ने कहा, ”कल मैंने कहा था कि हम तीव्र प्रगति और नई खोजों के युग की दहलीज पर हैं, लेकिन सर्वोत्तम परिणामों की गारंटी नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना होगा कि एआइ के लाभ सभी को और हर जगह उपलब्ध हों।”
गूगल को दोनों देशों के बीच प्रतीकात्मक या वास्तविक रूप से एक संपर्क बिंदु के रूप में काम करने पर गर्व है। उन्होंने कहा, ”हमारे पास दोनों देशों में टीमें हैं, जो हमारी कुछ सबसे महत्वपूर्ण पहलों पर निर्बाध रूप से साथ काम कर रही हैं। भारत में शुरू हुए नवाचार, जैसे गूगल पे, दुनिया भर के लोगों के लिए उत्पादों को बेहतर बना रहे हैं।” भारत को लेकर आशावादी पिचाई ने कहा, ”मेरा मानना है कि भारत एआइ के क्षेत्र में असाधारण प्रगति करेगा, और हम इसका समर्थन कर रहे हैं।”-
जैविक बुद्धिमत्ता और एआइ से बदल जाएगा चिकित्सा क्षेत्र: किरण मजूमदार-शॉ
जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी बायोकान की अध्यक्ष किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि जैविक बुद्धिमत्ता और एआइ के मेल से चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। एआइ समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बीमारियों का पहले पता लगाने और जीवन प्रबंधन को गति मिल सकती है।
किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि जैविक प्रणालियां डेटा सेंटर की तरह काम करती हैं, जो गीगावाट बिजली से चलने वाले एआइ प्रणाली की तुलना में बहुत कम ऊर्जा में जानकारी का विश्लेषण करती हैं।
उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान से एआइ को बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है जैसे कि कम ऊर्जा में काम कैसे करें, तेजी से कैसे काम करें और अलग-अलग तरह के डाटा का तुरंत विश्लेषण कैसे करें।
उन्होंने बताया कि एआइ और जीव विज्ञान का संगम एक शक्तिशाली परिवर्तनकारी प्रक्रिया होगी। भारत इस वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि एआइ क्षतिग्रस्त ऊतकों और अंगों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण विज्ञान को गति दे सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल- केंद्रित मॉडल से हटाकर पूर्वानुमानात्मक एवं निवारक सामुदायिक देखभाल की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।
ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री ने सभी के लिए सुरक्षित और न्यायसंगत एआइ पर दिया जोर
ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने सभी के लिए सुरक्षित, समावेशी और न्यायसंगत एआइ उपलब्ध कराने के महत्व पर शुक्रवार को जोर दिया।
लैमी ने भारत मंडपम में आयोजित एआइ इंपैक्ट समिट के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एआइई के मामले में दुनिया के सामने दो पहलू हैं, पहला-जिसमें एआइ लोगों से ताकत और अवसर छीन लेता है तथा हमें विभाजित करता है और दूसरा-जिसमें एआइ का इस्तेमाल समस्याओं को हल करने और पूरी मानवता को ऊपर उठाने के लिए एक सकारात्मक शक्ति के रूप में किया जाता है।
‘सभी की भाषा बोलना : समावेशी एआइ अवसरों की कुंजी’
सत्र में लैमी ने एआइ से जुड़ी कुछ परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जिनमें ‘एशिया एआइई डेवलपमेंट आब्जर्वेटरी’ शामिल है, जो जिम्मेदार एआइ शासन सुनिश्चित करने वाला एक नया नेटवर्क होगा।
उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं और साथ ही उभर रहे कई नये संस्थान एवं गठबंधन यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि हम सही रास्ते पर चलें। यह रास्ता सुरक्षित एआइ, समावेशी एआइ और सबसे महत्वपूर्ण बात सभी के लिए न्यायसंगत एआइ का है।
दैनिक जागरण
‘विकसित भारत का सपना AI से हो सकता है साकार’, एआई शिखर सम्मेलन में बोलीं IMF प्रमुख
अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की प्रमुख क्रिस्टलिना जार्जीवा ने कहा कि एआई वैश्विक आर्थिक वृद्धि को 0.8% तक बढ़ा सकता है, जिससे भारत का ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल हो सकता है।
21 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टलिना जार्जीवा ने शुक्रवार को कहा कि एआई से वैश्विक आर्थिक वृद्धि 0.8 प्रतिशत तक बढ़ सकती और भारत के ‘विकसित भारत’ बनने के सपने को साकार करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही उन्होंने नौकरियों और वित्तीय स्थिरता को लेकर इसके खतरे के प्रति आगाह किया और एआई के उपयोग में संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। IM की प्रबंध निदेशक जार्जीवा ने यहां एआई शिखर सम्मेलन में कहा, ‘एआई वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। हमारा अनुमान है कि यह बढ़ोतरी 0.8 प्रतिशत हो सकती है।
‘विकसित भारत’ का सपना साकार करेगा AI
इससे जाहिर होता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी से पहले की तुलना में अधिक तेज गति से बढ़ सकती है। यह ज्यादा अवसर और अधिक रोजगार सृजन की दृष्टि से बहुत अच्छा है। हम भारत के लिए भी इसी तरह का प्रभाव देख रहे हैं।
इसका मतलब है कि भारत के लिए विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव है।’ जबकि रोजगार पर एआई के नकारात्मक प्रभावों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमने इसके जोखिम का आकलन किया है और यह बहुत अधिक है।
नौकरियों पर एआई का प्रभाव सुनामी की तरह हो सकता है। दुनिया भर में एआई से लगभग 40 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। उभरते बाजारों पर यह प्रभाव 40 प्रतिशत हो सकता है, जबकि विकसित देशों में यह 60 प्रतिशत तक हो सकता है।’
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