Rashtriya Swayamsevak Sangh के सरसंघचालक डॉ. Mohan Bhagwat जी ने Pathankot में पूर्व सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विचार रखे।
27 फरवरी, 2026 – पठानकोट : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी ने मंगलवार को पठानकोट दौरे के दौरान किरण ऑडिटोरियम में सेवानिवृत्त कमीशंड सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद गोष्ठी को संबोधित किया। कार्यक्रम को गरिमापूर्ण एवं प्रेरणादायी बताया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
“वन्दे मातरम्” से कार्यक्रम की शुरुआत और प्रदर्शनी
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से “वन्दे मातरम्” के गायन से हुई। सभागार में “वन्दे मातरम्” के इतिहास, उसकी गरिमा और उससे जुड़े प्रोटोकॉल पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसके अतिरिक्त तीनों सेनाओं के परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों का परिचय कराती प्रदर्शनी ने उपस्थित अधिकारियों को प्रेरित किया।
संघ की स्थापना, उद्देश्य और कार्यपद्धति पर विचार
अपने संबोधन में सरसंघचालक डॉ. भागवत जी ने संघ की स्थापना, उद्देश्य और कार्यपद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए उसके कार्य को निकट से जानना आवश्यक है। उनके अनुसार संघ किसी प्रतिस्पर्धा या प्रचार की भावना से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर कार्य करता है और सत्ता या लोकप्रियता उसका उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ समाज से अलग नहीं, बल्कि समाज का संगठित रूप है। वर्तमान में संघ देशभर में 1.30 लाख से अधिक सेवा कार्यों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय है।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विषयों पर बल सरसंघचालक जी ने सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक जीवन मूल्यों, स्वदेशी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना विविधता में एकता का सशक्त उदाहरण है और यही भावना समाज जीवन में भी सुदृढ़ होनी चाहिए। उन्होंने अन्य राष्ट्रहितैषी संगठनों और व्यक्तियों के साथ समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।
“पंच परिवर्तन” की अवधारणा
“पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक जी ने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों की मजबूती, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्यनिष्ठा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उनका कहना था कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन ही राष्ट्र को सशक्त बनाता है और सेना के अनुशासन, निष्ठा तथा समर्पण जैसे गुण समाज जीवन में भी अपनाए जाने चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली
पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने संतुलित जीवनशैली पर जोर दिया। कार्यक्रम में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और फ्लेक्स बैनरों का उपयोग नहीं किया गया।
पारिवारिक मूल्य और स्वदेशी पर जोर
पारिवारिक मूल्यों पर बोलते हुए सरसंघचालक जी ने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की शक्ति बताया। स्वदेशी को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने स्थानीय एवं गृह-आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही। कार्यक्रम स्थल पर गौ सेवा संस्थान और ग्रामीण उत्पादों से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रश्नोत्तर सत्र
राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि केवल सीमाओं की रक्षा पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आर्थिक सुदृढ़ता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें अधिकारियों ने समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछे और सरसंघचालक ने विस्तार से उत्तर दिए।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ हुआ। अंत में सभागार में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के संकल्प की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
पांचजन्य