पैसे खत्म, गुरुद्वारे में भोजन का सहारा
मध्य पूर्व में तनाव के कारण उड़ानें प्रभावित होने से बहादुरगढ़ की तीन महिलाएं दुबई में फंस गई हैं। पैसे और दवाइयां खत्म होने लगी हैं। वे गुरुद्वारे के लंगर के सहारे हैं और सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग कर रही हैं।
06 मार्च, 2026 – पटियाला : अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने खाड़ी देशों की उड़ानों पर असर डाला है। इससे छुट्टियां मनाने दुबई गईं पटियाला के बहादुरगढ़ की तीन महिलाएं (दो ननद और एक भाभी) इन दिनों युद्ध जैसे हालात के कारण परदेश में गंभीर संकट का सामना कर रही हैं।
दुबई में फंसी सरबजीत कौर, संदीप कौर और जसपाल कौर ने बताया कि उनके साथ जालंधर की भी महिलाएं थी और उनका सात महिलाओं का ग्रुप 27 फरवरी को भारत से दुबई पहुंचा था, जबकि 3 मार्च को वापस लौटना था, लेकिन अचानक बदले हालात ने उनकी वापसी की योजना पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी।
परिजनों के अनुसार 3 मार्च की उनकी वापसी उड़ान पहले रद्द कर 5 मार्च के लिए री-शेड्यूल की गई। इसके बाद हालात और बिगड़ने पर फ्लाइट 7 मार्च के लिए टाल दी गई। लगातार बदलते शेड्यूल और हवाई सेवाओं में बाधा ने उन्हें असमंजस और भय की स्थिति में डाल दिया है। एयरपोर्ट जाने से मना किया गया है और केवल सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जा रही है।
पैसे लगभग खत्म, गुरुद्वारे का सहारा
लंबे प्रवास और अनिश्चित वापसी के कारण उनके पास मौजूद नकदी लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारा साहिब की शरण लेने का निर्णय किया। युद्ध जैसे हालात के कारण उन्हें वहां ठहरने की अनुमति तो नहीं मिली, लेकिन लंगर में भोजन करने की इजाजत दी गई है।
इसके लिए उन्हें रोजाना लगभग 15 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। सीमित संसाधनों और असुरक्षा के माहौल में यह दूरी तय करना उनके लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण बन गया है।
दवाइयों की कमी
तीनों महिलाओं में से एक को नियमित दवाइयों की आवश्यकता है, जो अब लगभग खत्म हो चुकी हैं। दुबई में बिना डाक्टर की सलाह के फार्मेसी से दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी बढ़ती जा रही है। डाक्टर तक पहुंच बनाना भी मौजूदा परिस्थितियों में आसान नहीं है।
महिलाओं और उनके परिजनों ने पंजाब सरकार और भारत सरकार से संपर्क साधा है। साथ ही दुबई स्थित भारतीय दूतावास से भी सहायता की गुहार लगाई गई। उन्होंने बताया कि पहले पंजाब सरकार की हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने सिर्फ यूएई में भारत की एंबेसी का नंबर और ईमेल दी। जिसके बाद समाजसेवी अमनदीप सिंह ने यूएई में भारत एंबेसी से संपर्क किया।
लेकिन कोई संतोषजनक ज़वाब नहीं मिला। फिलहाल उन्हें केवल सुरक्षा बरतने और एयरपोर्ट न जाने की सलाह दी गई है, लेकिन ठोस राहत या वापसी की स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। पीड़ितों का कहना है कि पैसे खत्म हो रहे हैं, दवाइयां नहीं मिल रहीं। सरकार को विशेष उड़ान या सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।
सुरक्षित वापसी की कर रहीं मांग
समाज सेवक अमनदीप सिंह ने होटल से 17 किलोमीटर दूर गुरुद्वारा साहिब में खाने का प्रबंध किया। उन्होंने खालसा ऐड से संपर्क करके फंसे भारतीयों की मदद करने की विनती की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि उनकी और अन्य फंसे भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जाए।
उनका कहना है कि लगातार बढ़ती अनिश्चितता और सीमित संसाधनों के बीच विदेश में रहना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
उधर दूसरी तरफ दुबई में फंसे तीन परिवार अपने स्तर पर इंतजाम करके भारत लौट आए हैं। उन्होंने बताया कि भारत वापिस लौटने के लिए सरकार या प्रशासन ने उनकी कोई सहायता नहीं की। जिस कारण वह अपने स्तर पर इंतजाम करके बुधवार-वीरवार मध्य रात करीब 12.30 बजे भारत वापिस पहुंचे हैं।
दैनिक जागरण