राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षीय यात्रा के साथ ‘भारती – नारी से नारायणी’ सम्मेलन दिल्ली में। भारतीय दृष्टि में महिला-पुरुष एक ही प्रकाश की दो ज्योतियाँ—पश्चिमी फेमिनिज्म से अलग सकारात्मक शक्ति पर जोर।
07 मार्च, 2026 – नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में आगामी 7 और 8 मार्च को भारत की महिला विचारकों का ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी राष्ट्र सेविका समिति, शरण्या और भारतीय विद्वत परिषद के पदाधिकारियों ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। ‘भारती – नारी से नारायणी’ के नाम से विज्ञान भवन में होने वाले इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी तथा समापन द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में होगा।
राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री अनायदानम ने कहा कि ‘भारती – नारी से नारायणी’ सम्मेलन केवल एक उद्घोष या नारा नहीं, बल्कि भारतीय नारी की सकारात्मक शक्ति को एकजुट करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं के अधिकारों के लिए अनेक संगठन कार्यरत हैं, किंतु समिति पूरे समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति पश्चिमी ‘फेमिनिज्म’ की उस अवधारणा से सहमत नहीं है, जिसमें पुरुषों के साथ संघर्ष का भाव निहित हो।
एक ही प्रकाश पुंज की दो ज्योतियां
सीता गायत्री अनायदानम के अनुसार भारतीय दृष्टि में महिला और पुरुष समान हैं—वे एक ही प्रकाश पुंज की दो ज्योतियाँ हैं। समिति की स्वयंसेविकाएं केवल महिलाओं के उत्थान तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सांस्कृतिक, नैतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से पूरे समाज के उत्थान के लिए कार्य करती हैं।
समिति का इतिहास
उन्होंने बताया कि समिति की स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी और अब इसे 90 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। वर्तमान में देशभर में 4500 शाखाएं संचालित हैं। स्वयंसेविकाओं द्वारा संचालित 65 गैर-सरकारी संगठन लगभग 2000 सेवा प्रकल्प चला रहे हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। महानगरों से लेकर ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों तक समिति का कार्य विस्तार पा चुका है। भारतीय विद्वत परिषद की सचिव डॉ. वी. शिवानी ने बताया कि ‘भारती – नारी से नारायणी’ एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मौन शक्ति से आगे बढ़ाकर प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता बनाना है। सम्मेलन में आठ प्रमुख विषयों—विद्या, शक्ति, मुक्ति, चेतना, प्रकृति, संस्कृति, सिद्धि और कृति—पर चर्चा होगी।
पंच परिवर्तन पर चर्चा
चार विशेष पैनलों के माध्यम से बहुआयामी विचार-मंथन होगा। महिला सांसदों का एक राष्ट्रीय पैनल ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर चर्चा करेगा। महिला कुलपतियों का अलग पैनल आयोजित होगा। ‘साध्वी संगम’ पैनल योग, धर्म और अध्यात्म के संगम पर विचार करेगा। डॉ. शिवानी ने बताया कि मुख्य सम्मेलन से पूर्व देशभर में इसी विषय पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे प्राप्त सुझावों तथा सम्मेलन में प्रस्तुत अनुशंसाओं को भारत सरकार के संबंधित विभागों को विचार एवं क्रियान्वयन हेतु भेजा जाएगा।
शरण्या की अध्यक्ष अंजू आहूजा ने कहा कि यह सम्मेलन देश के प्रत्येक वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि नारी को ‘नारायणी’ के स्तर तक प्रतिष्ठित करना उनकी संस्था का लक्ष्य है। इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की दिल्ली प्रांत प्रमुख रचना वाजपेयी ने बताया कि सम्मेलन में प्रमुख संचालिका शांता अनायदानम, साध्वी ऋतंबरा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, अन्नपूर्णा देवी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।
पांचजन्य