खाद, रफ डायमंड सहित कई वस्तुओं की किल्लत की आशंका
ईरान युद्ध के कारण भारतीय व्यापार पर गहरा असर दिख रहा है। निर्यातकों और आयातकों को खाद, रफ डायमंड, सिंथेटिक यार्न और पॉलीथीन जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की कमी की आशंका है।
07 मार्च, 2026 – नई दिल्ली : ईरान युद्ध के थमने की संभावना नहीं देख निर्यातक व आयातक दोनों की चिंता बढ़ती जा रही है। खाद से लेकर रफ डायमंड व सिंथेटिक यार्न जैसे आइटम की किल्लत की आशंका पैदा हो गई है। पोलीथिलीन जैसे औद्योगिक कच्चे माल की भी कमी महसूस की जाने लगी है।
कई निर्यातकों ने उत्पादन की गति को धीमा कर दिया है। हालांकि आयात-निर्यात में आने वाली बाधा पर नजर रखने एवं उसे दूर करने में मदद के लिए एक अंतर-मंत्रालीय कमेटी बनाई गई है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय रियल टाइम के आधार पर तमाम चीजों की निगरानी कर रहा है और मंत्रालयों की आपसी सहभागिता में भी मदद कर रहा है। निर्यातकों का यह भी कहना है कि ऐसी स्थिति में वे अमेरिकी शुल्क में कटौती का भी फायदा नहीं उठा पा रहे हैं।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने अगले 150 दिनों के लिए सभी देशों पर एक समान 10 प्रतिशत का शुल्क कर दिया है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को इस महीने अमेरिका में बंपर निर्यात करने की उम्मीद थी।
पश्चिम एशिया से 100 अरब डॉलर का आयात करता है भारत
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पश्चिम एशिया से करीब 100 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात करता है। इनमें बड़ी हिस्सेदारी पेट्रोलियम पदार्थ और गैस की है। लेकिन रफ डायमंड के साथ सिंथेटिक यार्न के अधिकतर आयात पश्चिम एशिया से ही है।
भारत सालाना 3.7 अरब डालर की खाद का आयात भी पश्चिम एशिया के देशों से करता है। कृषि संबंधी 50 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र में होता है। ईरान, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व यूएई, इजरायल जैसे देश पश्चिमी एशिया के देशों में शामिल हैं।
इन वस्तुओं की बढ़ जाएंगी कीमतें
भारत पश्चिम एशिया से पिछले साल 3.7 अरब डॉलर की खाद का आयात किया था। नाइट्रोजन खाद का 30 प्रतिशत इस क्षेत्र से ही आयात किया जाता है। युद्ध लंबा चलने पर इनकी सप्लाई बाधित होगी जिससे इन वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। वैसे ही, वर्ष 2025 में भारत ने 6.8 अरब डॉलर के रफ डायमंड का पश्चिम एशिया से आयात किया था जो रफ डायमंड के कुल आयात का 40 प्रतिशत है।
रफ डायमंड का आयात कर उसमें वैल्यू एडिशन करके उसका निर्यात किया जाता है। सूरत इसका सबसे बड़ा गढ़ है जहां लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सिंथेटिक यार्न और मैनमेड फाइबर का आयात स्ट्रेट ऑफ हरमुज के रूट से होने से इसकी लागत तीन से चार गुना बढ़ गई है। पिछले दो दिनों में मैनमेड फाइबर की कीमत में 10 रुपए प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
पैकेजिंग के साथ प्लास्टिक पाइप के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला 35 प्रतिशत पोलीथिलीन का आयात पश्चिम एशिया के देशों से होता है। पिछले साल भारत ने पश्चिम एशिया के देशों से 1.2 अरब डॉलर के पोलीथिलीन और पोलिमर्स का आयात किया था।
सीमेंट उत्पादन के लिए जरूरी आइटम लाइमस्टोन के आयात के लिए भी भारत पश्चिम एशिया देशों पर निर्भर करता है। इसकी कमी से सीमेंट की कीमत बढ़ सकती है। औद्योगिक कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले सल्फर और जिप्सम जैसे आइटम का भी बड़ी मात्रा में पश्चिम एशिया देशों से आयात किया जाता है।
दैनिक जागरण