शोक जताएं, माहौल न बिगाड़ें
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर RSS ने कहा है, शोक मनाना स्वाभाविक है। लेकिन, इसकी वजह से सामाजिक सौहार्द नहीं बिगड़ना चाहिए।
17 मार्च, 2026 – नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने ईरान युद्ध की वजह से देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बहुत बड़ा संदेश दिया है। RSS ने कहा है कि किसी की मौत पर शोक जताना स्वाभाविक है, लेकिन यह शांतिपूर्ण होना चाहिए, जिससे कि सामाजिक सौहार्द न बिगड़े और न ही किसी समुदाय को निशाना बनाया जाए।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबले ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद भारत में हुए प्रदर्शनों को लेकर रविवार को एक प्रश्न के उत्तर में यह प्रतिक्रिया दी। RSS की ओर से यह प्रेस कांफ्रेंस हरियाणा में पानीपत के समालखा में संघ के तीन दिनों की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के समापन पर बुलाई गई थी।
‘खामेनेई की मौत पर शोक जताएं, सामाजिक माहौल न बिगाड़ें’
RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा, ‘लोगों की अपनी भावना है और वह शोक व्यक्त कर सकते हैं। लेकिन, ये चीजें शांतिपूर्ण तरीके से होनी चाहिए और किसी अन्य समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए या न ही सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना चाहिए।’
राष्ट्रहित को देखकर केंद्र सरकार उठा रही कदम-RSS
इस दौरान RSS नेता ने रविवार को यह भी कहा कि पश्चिम एशिया या खाड़ी क्षेत्र में जो युद्ध हो रहा है, उसको लेकर केंद्र सरकार की ओर से जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वह राष्ट्रहित को देखकर लिए जा रहे हैं।
युद्ध जितनी जल्दी हो समाप्त होना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से प्रयास हो रहे हैं, जो कि देश के लोगों के बेहतर हित में हैं।
‘वैश्विक शांति हमारा दृष्टिकोण, वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास’
समालखा के माधव सृष्टि में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस युद्ध को लेकर पूछे गए एक और सवाल के जवाब में संघ के नेता बोले, ‘वैश्विक शांति हमारा दृष्टिकोण है, क्योंकि हम वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास करते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हाल में हुई एक बैठक में यह चर्चा हुई कि एक व्यक्ति को न सिर्फ अपने देश की बेहतरी के बारे में सोचना चाहिए, बल्कि पूरे विश्व के बारे में सोचना चाहिए।’
RSS की सबसे बड़ी बैठक को लेकर महत्वपूर्ण बातें
- अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा RSS की निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है।
- ‘संघ में सभी का स्वागत है। समाज की बेहतरी के लिए सकारात्मक कार्य में जो भी लगा है, उसे संघ स्वयंसेवक मानता है।’
- प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक तक मौजूदा ‘प्रातों’ को ‘संभागों'(RSS का आंतरिक संगठनात्मक प्रशासनिक ढांचा) में बदलने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस योजना के अमल में आने पर मौजूदा 46 ‘प्रातों’ की जगह 80 से ज्यादा ‘संभाग’ बन जाएंगे।
मुसलमानों और हिंदुओं पर RSS का दृष्टिकोण
- हम सबका DNA एक है।
- डॉ के बी हेडगेवार ने RSS की स्थापना मुसलमानों के विरोध के लिए नहीं की थी।
- संघ ने हमेशा कहा है कि सभी भारतीयों के पूर्वज हिंदू थे।
- बालासाहेब देवरस ने भारत को ‘मातृभूमि’ और ‘राष्ट्र’ मानने वालों और ‘भारतीयता’ की भावना रखने वालों को ‘हिंदू’ के रूप में परिभाषित किया।
नवभारत टाइम्स