राजनीतिक दखल पर की सख्त टिप्पणी
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मोगा के बाघापुराना पंचायत समिति चुनाव विवाद में कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने SDM को वायरल पत्र पर फटकार लगाई और राजनीतिक दखलंदाजी पर टिप्पणी की।
25 मार्च, 2026 – चंडीगढ़ : मोगा के बाघापुराना पंचायत समिति चुनाव विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन और राजनीतिक दखल दोनों पर तीखी टिप्पणियां कीं। सुनवाई के दौरान SDM के पेश होने पर अदालत ने सबसे पहले उस पत्र पर सवाल उठाया, जो मुख्य सचिव को लिखा गया था और बाद में इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया।
हाई कोर्ट ने SDM से पूछा कि एक संवेदनशील पत्र सार्वजनिक कैसे हुआ। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि उन पर किसी प्रकार का दबाव था तो उन्हें नियमानुसार अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मामला रखना चाहिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी से इस तरह की कार्यप्रणाली की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि यदि पत्र में लगाए गए आरोप सही साबित नहीं होते तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस पर SDM ने अदालत को बताया कि उन्होंने यह पत्र दबाव में आकर लिखा था। हालांकि, कोर्ट ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अधिकारी के पास अवकाश लेने या सीधे मुख्य सचिव से मिलकर अपनी बात रखने का विकल्प भी था।
अदालत ने दोहराया कि संस्थागत व्यवस्था के भीतर ही समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पंजाब के एडवोकेट जनरल को भी आगाह करते हुए कहा कि अदालत की टिप्पणियों का गलत फायदा न उठाया जाए।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि मामले में और गहराई से जांच की गई तो सरकार के लिए स्थिति असहज हो सकती है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि पंचायती राज अधिनियम के तहत स्थानीय विधायक को पंचायत समिति के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव में भाग लेने का अधिकार नहीं है।
आरोप लगाया गया कि स्थानीय विधायक के प्रभाव में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है। इस पर अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि जिसे कानून के तहत मतदान का अधिकार नहीं है, वह चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि आगामी शनिवार को चुनाव जिला उपायुक्त (डीसी) की प्रत्यक्ष निगरानी में कराए जाएंगे।
इसके साथ ही पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति में स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध हो सके साथ ही कोर्ट ने कोर्ट में मौजूद महिला वकील जपजीत सिद्धू को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
दैनिक जागरण