मोबाइल एप और पोर्टल पर होगा पूरा काम
भारत में 16 साल बाद पहली बार डिजिटल जनगणना शुरू हो रही है, जो मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी। यह दो चरणों में होगी: पहले चरण में घरों की गिनती और दूसरे में जातीय जनगणना।
31 मार्च, 2026 – नई दिल्ली : करीब 16 साल बाद देश में जनगणना का काम एक नए और डिजिटल स्वरूप में शुरू होने जा रहा है, जो कई मायनों में अलग और आधुनिक होगी। पहली बार पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होगी। जनगणना दो चरणों में होगी।
पहले चरण में घरों की गिनती यानी हाउस लिस्टिंग होगी। उसके साथ ही उनके घरों में प्रयुक्त सामग्री और मौजूद सामग्री के जरिए आर्थिक स्थिति की भी जानकारी इकट्ठी की जाएगी। दूसरे चरण में जातीय जनगणना होगी। डेटा संग्रह की प्रक्रिया तेज होगी और 2027 तक आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे। करीब 34 लाख कर्मचारी लगाए जाएंगे।
पूरी तरह पारदर्शी होगी जनगणना
सरकार का दावा है कि जनगणना पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी होगी। देश में पिछली बार 2011 में जनगणना हुई थी। इस बार जनगणना में सबसे ज्यादा जोर आंकड़ों की गोपनीयता पर दिया जाएगा। जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर इस जनगणना को देश के लिए बड़ा प्रशासनिक एवं तकनीकी कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम, गोपनीयता और आम लोगों की भागीदारी इसे पहले से अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है। मृत्युंजय ने कहा कि सबकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।
यह डाटा न तो किसी सरकारी योजना के लाभ के लिए इस्तेमाल होगा और न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकेगा। यहां तक कि सूचना का अधिकार के तहत भी किसी तरह की जानकारी साझा नहीं होगी। केवल समग्र आंकड़े ही सार्वजनिक किए जाएंगे। इसका मकसद लोगों में भरोसा पैदा करना है, ताकि वे सही और सटीक जानकारी दें।
कितने चरण में होगी जनगणना
पहले चरण में अप्रैल से सितंबर के बीच देशभर के सभी मकानों, ढांचों और परिवारों का विवरण जुटाने का काम अलग-अलग राज्यों में तय समय पर पूरा किया जाएगा।
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों को अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस दौरान घरों की स्थिति, कमरों की संख्या, स्वामित्व, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग जैसी बुनियादी जानकारी ली जाएगी।
इस चरण में जाति या धर्म से जुड़े सवाल नहीं पूछे जाएंगे। घर गिनने का काम 30 दिनों की अवधि में किया जाएगा, जिसकी तिथि प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश द्वारा एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच अधिसूचना के माध्यम से तय की जाएगी।
खुद भी शामिल हो सकते हैं जनगणना में
देश में पहली बार आम लोगों को भी जनगणना में सीधे भाग लेने का मौका दिया गया है। इसके लिए सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा शुरू की गई है। नागरिक एक निर्धारित 15 दिन की अवधि में आनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं। हालांकि इसके बाद भी गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।
हर छह गणनाकर्मियों पर एक सुपरवाइजर की निगरानी रहेगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे। कागजी फार्म पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं, जिससे समय की बचत होगी और डेटा तुरंत डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा। हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू होने से 15 दिन पहले स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध होगा।
दिल्ली नगरपालिका परिषद और छावनी क्षेत्र में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी। यहां स्व गणना का काम एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा। इसी तरह नगर निगम दिल्ली क्षेत्र में 16 मई से 15 जून तक घरों की गिनती का काम होगा और स्व गणना एक मई से 15 मई तक चलेगी।
पोर्टल पर 33 सामान्य सवाल
सरकार ने पहले चरण के लिए 33 सामान्य सवाल तय किए हैं, जिन्हें पोर्टल पर भी उपलब्ध कराया गया है। ये सवाल आम और बुनियादी जानकारी से जुड़े हैं, ताकि हर व्यक्ति आसानी से जवाब दे सके। सवालों को सरल भाषा में रखा गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग बिना किसी परेशानी के अपनी जानकारी दे सकें। सरकार का दावा है कि इस बार डेटा संग्रह की प्रक्रिया तेज होगी और 2027 तक कई आंकड़े जारी भी कर दिए जाएंगे।
दूसरे चरण में होगी जातीय जनगणना
जनगणना का एक अहम पहलू यह है कि दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। आजादी के बाद पहली बार इस स्तर पर जातीय आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। हालांकि, इसके लिए सवालों का अंतिम स्वरूप अभी तय किया जा रहा है। विशेषज्ञों और विभिन्न सुझावों पर विचार करने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे नीतियां बनाने में मदद मिलेगी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन हो सकेगा।बंगाल ने अभी तक नहीं की अधिसूचना जारी मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अप्रैल में पहले चरण की शुरुआत के लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जबकि 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मई में और दस राज्य जून या उसके बाद शुरू करेंगे।
बंगाल ने अभी तक जनगणना कराने के लिए अधिसूचना जारी नहीं की है और इस मुद्दे को राज्य सरकार के साथ उठाया गया है। हालांकि सरकार के पास पहले चरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 30 सितंबर तक का समय है।
दैनिक जागरण