लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी का जोरदार संबोधन। बोले — ये महिलाओं का अधिकार है, राजनीति से ऊपर उठकर इसे लागू करना होगा।
18 अप्रैल, 2026 – नई दिल्ली : लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अहम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में समान भागीदारी देने का ऐतिहासिक अवसर है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण किसी प्रकार की कृपा नहीं, बल्कि महिलाओं का अधिकार है, जिसे लंबे समय से टाला जाता रहा है।
हम भाग्यशाली हैं कि यह अवसर हमें मिला पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश के संसदीय लोकतंत्र में ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते, जब समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता मिलकर एक ऐतिहासिक निर्णय को जन्म देते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की हजारों साल पुरानी परंपरा में यह एक नया आयाम जोड़ने का समय है और सभी सांसदों को इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए।
विकसित भारत के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण में नारी शक्ति की सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक दलों से सर्वसम्मति की अपील
पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीति के तराजू पर नहीं तौलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी दल मिलकर इस निर्णय को लेते हैं, तो इसका लाभ किसी एक पार्टी को नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि वूमेन रिजर्वेशन का विरोध करने वालों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ग्रासरूट स्तर पर महिला नेतृत्व की ताकत का जिक्र
प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आई हैं और अब वे मजबूत जनमत तैयार करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यह महिला नेतृत्व अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय नीति को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
महिलाओं को रोकना नहीं, आगे बढ़ाना समय की मांग
पीएम मोदी ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में महिलाएं देश का गौरव बढ़ा रही हैं, ऐसे में उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नारी सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित न रखकर उसे वास्तविक भागीदारी में बदला जाए।
देरी पर जताई चिंता, जल्द लागू करने की जरूरत बताई
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है और अब इसे और टालना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नारी सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित न रखकर उसे वास्तविक भागीदारी में बदला जाए।
देरी पर जताई चिंता, जल्द लागू करने की जरूरत बताई
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है और अब इसे और टालना उचित नहीं होगा।उन्होंने कहा कि यदि आने वाले चुनावों तक भी इसे लागू नहीं किया गया, तो यह देश की महिलाओं के विश्वास को कमजोर करेगा। इस संदर्भ में महिला आरक्षण बिल को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया।
यह देश के प्रति हमारी नीयत की परीक्षा है
पीएम मोदी ने कहा कि देश की महिलाएं केवल निर्णय ही नहीं, बल्कि नेताओं की नीयत को भी देखेंगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर किसी प्रकार की राजनीति या देरी की गई, तो देश की नारी शक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगी।
संविधान सर्वोपरि, सबको साथ लेकर चलना हमारा दायित्व
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने संविधान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देश को टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया में किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अवसर मिलेगा। यह संदेश संवैधानिक व्यवस्था और समान प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि महिला आरक्षण केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या संसद इस मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाकर इसे ऐतिहासिक रूप से पारित करती है या नहीं।
पांचजन्य