वैश्विक संकट के बीच नए बाजारों ने खोले निर्यात के रिकॉर्ड रास्ते
भारत को निर्यात विविधता का लाभ मिल रहा है, जिससे उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे नए बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ी है। हालांकि, पश्चिम एशिया विवाद के कारण अप्रैल में रत्न एवं आभूषण निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
18 मई, 2026 – नई दिल्ली : निर्यात विविधता का फायदा भारत को मिलने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल कुल निर्यात में उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से ज्यादा रही।
मूल्य की बात करें तो 2025-25 में इन देशों को 441.78 अरब डालर का वस्तु निर्यात किया गया। वैश्विक व्यापार में व्यवधान के बावजूद भारत द्वारा निर्यात विविधता और नए बाजार तलाशने की कवायद का ही नतीजा रहा कि अप्रैल में निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डालर रहा।
अधिकारी ने क्या बताया?
पूर्वी अफ्रीका को निर्यात 13.7 प्रतिशत बढ़कर 12.6 अरब डालर हो गया जो भारत के निर्यात का 2.9 प्रतिशत है। उत्तरी अफ्रीका को निर्यात 14.8 प्रतिशत बढ़कर आठ अरब डालर हो गया और कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही। एक अधिकारी ने कहा, “2025-26 में भारत का निर्यात बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को दिखाता है, जिसमें वैश्विक व्यापार में रुकावटों के बावजूद एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में मजबूत वृद्धि हुई है।”
आंकड़ों पर गौर करें तो कुल निर्यात में उत्तरी अमेरिका का दबदबा बना हुआ है और पिछले साल इस क्षेत्र को निर्यात 97.7 अरब डालर रहा। यह कुल निर्यात का 22.1 प्रतिशत है। हालांकि, निर्यात में वृद्धि की बात करें तो यह साल-दर-साल मात्र 1.3 प्रतिशत रही।
निर्यात में सबसे ज्यादा तेजी उत्तर-पूर्व एशिया क्षेत्र में रही। इस क्षेत्र में निर्यात 21.6 प्रतिशत बढ़कर 41.6 अरब डालर हो गया और इससे भारत के कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई।
इस क्षेत्र में इंडियन इलेक्ट्रानिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल और इंडस्टि्रयल प्रोडक्ट की मांग बढ़ रही है। चीन, जापान, दक्षण कोरिया, उत्तर कोरिया, मंगोलिया और ताइवान जैसे देश इस क्षेत्र में आते हैं। दक्षिण अमेरिका को निर्यात 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16.4 अरब डालर हो गया। इस तरह कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत रही।
अप्रैल में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात नौ प्रतिशत घटा
पश्चिम एशिया विवाद के बाद अप्रैल में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 9.07 प्रतिशत घटकर 20,825.01 करोड़ रुपये रह गया। उद्योग क्षेत्र की सबसे बड़ी संस्था रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के मुताबिक, 2025 में इसी महीने कुल निर्यात 20,952.26 करोड़ करोड़ रुपये था।
उद्योग संगठन के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया, “निर्यात में गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद की वजह से है। इससे दुनियाभर में दिक्कतें आई हैं और निर्यात पर असर पड़ा है। भू-राजनीतिक तनाव के अलावा शुल्क को लेकर अनिश्चितता के चलते अमेरिका को होने वाला निर्यात भी प्रभावित हुआ है।”
अप्रैल में कटे और पालिश किए हुए हीरों का कुल निर्यात 19.65 प्रतिशत घटकर 89.09 करोड़ डालर रह गया जबकि पिछले साल इसी समय यह 11.08 करोड़ डालर था। लैब में बने पालिश किए हुए हीरों का निर्यात अप्रैल में 15.53 प्रतिशत घटकर 9.3 करोड़ डालर रह गया जबकि पिछले साल इसी समय यह 11.04 करोड़ डालर था।
अप्रैल में सोने की ज्वेलरी का निर्यात 21.77 प्रतिशत घटकर 84.15 करोड़ डालर रह गया जबकि पिछले साल इसी समय यह 107.56 करोड़ डालर था। पिछले महीने चांदी के गहनों का निर्यात 444 प्रतिशत बढ़कर 26.83 करोड़ डालर हो गया जबकि पिछले साल इसी महीने यह 4.93 करोड़ डालर था।
दैनिक जागरण