अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी मनाई जा रही है। श्री अकाल तख्त साहिब पर अखंड पाठ का भोग डाला गया। जत्थेदार के समाज के नाम संदेश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में खालिस्तान के समर्थन में नारे लगे।
06 जून, 2026 – अमृतसर : अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब स्थित श्री अकाल तख्त साहिब पर आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी मनाई जा रही है। श्री अकाल तख्त साहिब पर शुरू हुए अखंड पाठ का भोग डाला गया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के संदेश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
जत्थेदार के संदेश के बाद ही खालिस्तान समर्थन में नारे लगने लगे और भारी गिनती में समर्थक तलवारे लहराते दिखाई दिए। हाथों में समर्थन में लोग पोस्टर लेकर श्री अकाल तख्त के नीचे इकट्ठे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि पंजाब हमारा होमलैंड है। हम विदेशों में जाकर बस गए हैं, लेकिन इसे छोड़ना नहीं है। हमें अपने बच्चों को यहां श्री हरिमंदिर साहिब लेकर आना है। जा कर कहीं भी बस जाओ, लेकिन हमें पंजाब की जमीन नहीं बेचनी है।
इस दौरान जत्थेदार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026 पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब व पंथ को कानूनी दायरे में लाने की साजिशें चल रही हैं। संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, गर्म ख्याली दल खालसा की तरफ से अमृतसर बंद की कॉल दी गई है। जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका बनी हुई है। आपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी को लेकर पुलिस और अर्द्ध सैनिक बल की पांच कंपनियों शहर में तैनात है और चप्पे चप्पे पर पुलिस की नजर है। श्री हरिमंदिर साहिब के आसपास के इलाकों दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी और तीन कंपनियों को तैनात किया गया है।
अपनों ने किया श्री हरिमंदिर साहिब पर हमला
जून 1984 की घटनाओं की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कौम के नाम संदेश पढ़ते हुए कहा कि जून 1984 में भारतीय सेना ने श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर कार्रवाई की थी, जिसमें दमदमी टकसाल के प्रमुख ज्ञानी जरनैल सिंह भिंडरांवाले, भाई अमरीक सिंह, जनरल शबेग सिंह समेत अनेक लोगों की मौत हुई।
उन्होंने कहा कि इस घटना में टैंकों और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसे सिख इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। जत्थेदार ने बीबी सतनाम कौर और बीबी वाहेगुरु कौर सहित उन महिलाओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने विश्वास के लिए बलिदान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान और परंपराओं को कमजोर करने के प्रयास हुए हैं।
साथ ही कहा कि सिख समुदाय ने दुनिया भर में मेहनत, सेवा और “सरबत दा भला” की भावना से सम्मान हासिल किया है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। जत्थेदार ने अपने संदेश में कहा कि पहले विदेशी ताकतें हमला करती थी। लेकिन इस घल्लूघारा में अपनों ने ही हमला किया।
सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश
ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि सिख इस देश के बराबरी के अधिकार रखने वाले नागरिक हैं और उन्होंने हमेशा अपनी आन, बान और शान के साथ जीवन व्यतीत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान को कमजोर करने और पांच ककारों को समाप्त करने जैसी नीतियां बनाई गईं तथा सिखों की अलग पहचान मिटाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर दुनिया भर से लोग आकर रहते हैं, लेकिन जब सिख अन्य राज्यों में बसने जाते हैं तो कई बार उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिख अपने गुरुओं और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का जज्बा रखते हैं।
जत्थेदार ने कहा कि आज सिख समुदाय पूरी दुनिया में अपनी मेहनत, सेवा और सरबत दा भला की भावना के कारण सम्मानित पहचान बना चुका है।
हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों को आधार बनाकर विश्व स्तर पर सिखों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया।
पुलिस मुस्तैत, रिजर्व फोर्सेस तैनात
हेरिटेज स्ट्रीट के चप्पे चप्पे की निगरानी पुलिस अफसर सीसी कैमरों के जरिए कर रही है। गुरुनगरी के मुख्य प्वाइंट्स पर 65 से ज्यादा जगहों पर नाकाबंदी लगए गए है। इंट्री प्वाइंट गोल्डन गेट, पठानकोट-अमृतसर मार्ग और तरनतारन – अमृतसर मार्ग पर नाकाबंदी की गई है।
रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, श्री दुर्ग्याणा मंदिर, श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पिछले दिनों से लगातार चैकिंग अभियान चल रहे हैं। यात्रियों के सामान की तलाशी ली जा रही है। इसके साथ ही यात्रियों को लावारिस दिखने वाली वस्तु में विस्फोटक होने के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।
जाने क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार
ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित सैन्य कार्रवाइयों में से एक माना जाता है। भिंडरावाले ने 1983 में अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया। उसने सिखों के लिए अलग संप्रभु राष्ट्र की मांग की। उस समय पंजाब में खालिस्तान समर्थक उग्रवाद बढ़ रहा था और जरनैल सिंह भिंडरांवाले सहित कई हथियारबंद उग्रवादी अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर और अकाल तख्त में मौजूद थे।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने सैन्य अभियान चलाने का फैसला लिया। इसकी शुरुआत 1 जून 1984 को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर की घेराबंदी के साथ हुई। 3 जून को पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया और संचार व यातायात पर भी प्रतिबंध लगाए गए। 5 और 6 जून की रात सेना ने मुख्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें भारी गोलीबारी और संघर्ष हुआ।
6 जून को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत की खबर सामने आई और पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया। 8 जून 1984 तक अभियान समाप्त घोषित कर दिया गया। इस कार्रवाई में सैनिकों, उग्रवादियों और श्रद्धालुओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। ऑपरेशन ब्लू स्टार आज भी पंजाब, सिख समुदाय और भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में गिना जाता है।
दैनिक जागरण