भारत की नई रिफाइनरी
यूक्रेन-रूस युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी बाड़मेर में एचआरआरएल की नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे, जिससे देश की रिफाइनिंग क्षमता बढ़ेगी और आत्मनिर्भरता आएगी।
04 जुलाई, 2026 – बाड़मेर : पहले यूक्रेन-रूस युद्ध और उसके बाद पश्चिम एशिया संकट ने विश्व में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर कई तरह से सवाल उठा दिए हैं। इन घटनाक्रमों ने कच्चे तेल और ईंधन की वैश्विक उपलब्धता पर गंभीर प्रभाव डाला है, जिससे कई देशों में उत्पादन और निर्यात प्रभावित हुआ है।
ऐसे में भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को और गति देने के संकेत दिए हैं, जो ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के बाड़मेर (पचपदरा, बालोतरा) में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) की नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी बाड़मेर में नई रिफाइनरी का करेंगे उद्घाटन
यह इंडियन आयल (आईओसी) की परादीप रिफाइनरी (2016) के बाद पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी व पेट्रोरसायन कॉम्प्लेक्स है। 90 लाख मैट्रिक टन सालाना की रिफाइनिंग क्षमता व 24 लाख मैट्रिक टन सालाना (एमएमपीटीए) पेट्रोरसायन क्षमता वाली इस परियोजना की कुल लागत 79,459 करोड़ रुपये की है। इससे वैश्विक बाजार में पेट्रो उत्पादों (पेट्रोल,डीजल आदि) की बिक्री करने में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि इस परियोजना का समय बेहद उपयुक्त है। अमेरिका में 1976 के बाद कोई बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी नहीं बनी है। यूरोप में रिफाइनरियां बंद हो रही हैं। वहां वर्ष 2030 तक 10-15 लाख बैरल रोजाना की क्षमता बंद होने की बात हो रही है।
चीन के शेडोंग प्रांत में छोटी ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों की बंदी हो रही है। जब चारों तरफ रिफाइनरियां बंद हो रही हैं तब एचआरआरएल की यह एक अनूठ विश्वस्तरीय परियोजना के रूप में उभरी है, जो भारत को भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने जा रहा है।
भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम
अंतरराष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी (आइईए) की पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक वैश्विक स्तर पर 42 लाख बैरल प्रतिदिन नई रिफाइनिंग क्षमता जोड़ी जाएगी जबकि इस दौरान 16 लाख बैरल रोजाना क्षमता की रिफाइनरियां बंद भी होंगी। असलियत में रिफाइरी क्षमता में वृद्धि मांग से ज्यादा होगी।
चीन व भारत में ही मुख्य तौर पर नई रिफाइनरी लगेंगी लेकिन अब चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में आशा से ज्यादा वृद्धि के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि वह नई रिफाइनरी क्षमता पर ब्रेक लगाएगा। दूसरी तरफ, भारत में और नई रिफाइनरियों की संभावनाएं भी तलाश रहा है।
बाड़मेर के बाद आंध्र प्रदेश में रामायपट्टनम के पास बीपीसीएल-ओआईएल की प्रस्तावित रिफाइनरी, गुजरात में ओएनजीसी की संभावित ग्रीनफील्ड परियोजना और विभिन्न रिफाइनरियों की क्षमता में और विस्तार (बरौनी, नुमालीगढ़, पानीपत आदि) पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। लक्ष्य यह है कि 2028 तक कुल रिफाइनिंग क्षमता को करीब 31 करोड़ मैट्रिक टन सालाना हो जाए। देश में अभी 23 रिफाइनरियां हैं जिनकी कुल क्षमता 25.8 करोड़ मैट्रिक टन सालाना है।
दैनिक जागरण