नेपाल में बाढ़ से 626 लोगों की मौत
भारतीय वायुसेना का C-130J विमान खाने-पीने और जरूरत के सामान सहित करीब 10 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है। सामान के साथ-साथ भारत ने 11 विशेषज्ञों की एक खास टीम भी भेजी है।
29 अगस्त, 2026 – काठमांडू : नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 626 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,482 से अधिक लोग लापता हैं। भारत ने तुरंत अपनी दोस्ती और इंसानियत का हाथ आगे बढ़ाया है।
इस भीषण संकट के बीच उम्मीद की किरण जगाते हुए भारतीय वायुसेना ने बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान शुरू किया है। वायुसेना का एक C-130J विमान प्रभावित परिवारों के लिए दवाएं और भोजन जैसी 10 टन आवश्यक जीवन रक्षक राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है।
भारतीय वायुसेना ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है, जिसके तहत C-17 ग्लोबमास्टर और अतिरिक्त C-130 विमानों के जरिए और अधिक भारी राहत सामग्री भेजने का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।
मदद के लिए 11 सदस्यों वाली भारतीय टीम पहुंची नेपाल
अचानक आई बाढ़ के बाद स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए शनिवार को 11 सदस्यों वाली एक भारतीय टीम नेपाल पहुंची। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार के अनुरोध पर यह टीम भेजी गई है, जिसमें मेडिकल स्टाफ और टनल रेस्क्यू के विशेषज्ञ शामिल हैं। इस टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत कार्य चल रहे हैं।
शुक्रवार को नेपाल ने कहा कि वह अपने सुरक्षा बलों की ज़्यादा से ज्यादा तैनाती को प्राथमिकता देना चाहता है, क्योंकि वे स्थानीय पर्यावरण और ऊबड़-खाबड़ इलाकों से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार मुश्किल मामलों में अंतरराष्ट्रीय मदद लेने के लिए तैयार है, जहां बहुत जटिल भौतिक संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की जरूरत होती है।
नेपाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद के लिए भारत और चीन से अनुरोध किया था। ये पोर्टेबल पुल बिना भारी मशीनरी या विशेष औजारों के तेज़ी से जोड़े जा सकने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
नेपाल में बाढ़ का असर
भोटे कोशी-त्रिशूली आपदा के बाद शुक्रवार शाम तक नेपाल और तिब्बत में कम से कम 626 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,482 लोग लापता हैं।
स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है क्योंकि नेपाल पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार लापता लोगों की सूची इससे कहीं अधिक है। सुरंगों में तलाशी अभियान जारी है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं या उनसे संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है।
84 सुरक्षित बचाए गए, 21 पहुंचे दिल्ली
राहत की खबर देते हुए विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में कम से कम 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें त्रिशूली-1 के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री शामिल हैं।
21 लोगों का यह समूह शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गया। जायसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके से कल काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक आज दिल्ली आ गए हैं।
इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि शुक्रवार को 149 भारतीय तिब्बत से नेपाल सीमा में प्रवेश कर गए हैं और करीब 400 अन्य भारतीय चीन की सीमा की तरफ सुरक्षित हैं।
320 भारतीय नागरिकों की तलाश जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शुक्रवार को नेपाल में 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि पहले यह संख्या 290 थी। इसके अलावा, अन्य देशों की नागरिकता रखने वाले लगभग 100 भारतीय मूल के लोगों से भी संपर्क नहीं हो सका है।
जायसवाल ने इसे तेजी से बदलती स्थिति बताया। शुक्रवार शाम तक भारत ने किसी भी भारतीय की मौत की पुष्टि नहीं की थी और विदेश मंत्रालय नेपाल के अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने के प्रयास में लगा हुआ है।
दैनिक जागरण
नेपाल की मदद के लिए आगे आया भारत, राहत सामग्री से लदा तीसरा विमान रवाना; टनल रेस्क्यू और मेडिकल टीम भी तैयार
भारत ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल को व्यापक मानवीय सहायता की पेशकश की है, जिसमें NDRF टीमों की तैनाती और राहत सामग्री शामिल है।
नई दिल्ली : नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारत ने पड़ोसी देश नेपाल को व्यापक मानवीय सहायता देने की पेशकश की है।
भारत की तरफ से आपदा प्रभावित इलाकों में शीघ्र नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की विशेषज्ञ टीम भेजने की पेशकश की गई है लेकिन शुक्रवार देर शाम तक इस बारे में नेपाल की मंजूरी नहीं मिली है।
लेकिन दूसरी तरफ ऐसी सूचना है कि आपदा वाले इलाकों में चीन की सेना राहत कार्य तेजी से लॉन्च कर चुकी है।
इस बारे में चीन की मीडिया में खबरें दिखाई जा रही हैं कि नेपाल व चीन की सेना मिल कर राहत कार्य चला रहे हैं। इससे कूटनीतिक सर्किल में कुछ चर्चाएं चल रही हैं कि कहीं नेपाल किसी दबाव में तो नहीं।
नेपाल सरकार का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर विदेशी मदद के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रही है। मित्र देशों की तरफ से आये प्रस्तावों को उनकी जरूरत को देखते हुए अनुमति दी जा रही है।
वर्ष 2015 में नेपाल ने बहुत ही विध्वंसकारी भूकंप का सामना किया था तब कई देशों की एजेंसियों ने वहां राहत कार्य चलाये थे लेकिन वह अनुभव बहुत अच्छा नहीं था। इन एजेंसियों के बीच आपसी प्रतिस्पर्द्धा का माहौल था। इस वजह से नेपाल सरकार इस बार अपनी स्थानीय पुलिस टीम व सुरक्षा बलों पर भरोसा कर रही है।
दैनिक जागरण