अकेला सैनिक ही पूरा टैंक कर देगा तबाह
भारत अपनी सीमाओं पर सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदेगा।
29 अगस्त, 2026 – नई दिल्ली : अपनी सीमाओं के अग्रिम मोर्चे पर सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए भारत अमेरिका से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम-जैवलिन की खरीद करेगा। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए भारत से प्रारंभिक समझौता होने की घोषणा की।
यद्यपि रक्षा मंत्रालय की ओर से सौदे के संदर्भ में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है मगर अमेरिकी खुलासे से स्पष्ट है कि भारत करीब 100 एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम जैवलीन की खरीद करेगा।
अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी के अनुसार मिडियम रेंज की इस हल्के पोर्टेबल खरीद आपूर्ति सौदे की कुल लागत 45.7 मिलियन डॉलर होगी और इसे संयुक्त सहयोग के तहत इसका भारत में उत्पादन करने का विकल्प भी खुला है।
भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदेगा
अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने शुक्रवार को इस एंटी टैंक मिसाइल खरीद सौदै का खुलासा करते हुए कहा ‘हम पुष्टि कर सकते हैं कि भारत ने जैवलिन सिस्टम के लिए ‘लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।’
दूतावास ने अमेरिकी सरकार के नवंबर 2025 के कांग्रेसनल अधिसूचना में जैवलिन सौदे के बारे में जारी ब्यौरे का अनुमोदन भी किया।वहीं भारत स्थित अमेरिकी राजदूत सरर्जियो गोर ने इसे बड़ी खबर बताते हुए कहा ‘भारत युद्ध में परखा हुआ जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है।
जैसा कि अमेरिकी रक्षा-युद्ध मंत्री पेट हेगसेथ ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में कहा था कि यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और इससे संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं।
जैवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन की गहराई को दिखाता है। हमारे रक्षा उद्योगों के लिए साथ मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है। हम भविष्य में सहयोग की अपार संभावनाएं देखते हैं जो दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेंगी।’
संयुक्त उत्पादन का विकल्प, रक्षा संबंध होंगे मजबूत
अमेरिका में जैवलिन सिस्टम का उत्पादन जैवलिन ज्वाइंट वेंचर द्वारा किया जाता है जो आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक साझेदारी है। अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली जैवलिन एक उन्नत मध्यम-रेंज वाली ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ (दागो और भूल जाओ) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। अमेरिका के कई सहयोगी देश भी इसका इस्तेमाल करते हैं।
जैवलिन को मोर्चे पर तैनात बख्तरबंद टैंक वाहनों और मजबूत ठिकानों सहित कई तरह के लक्ष्यों को निशाना बनाने की दृष्टि से डिजाइन किया गया है जिसे अकेला सैनिक ही संचालित कर सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की सेना ने इसका इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले साल नवंबर में भारत को एफजीएम-148 जैवलिन हथियार सिस्टम बेचने की मंजूरी दी थी।
45.7 मिलियन डॉलर की डिफेंस डील
अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी ने पिछले साल नवंबर में जैवलिन मिसाइल सिस्टम भारत को बेचने की घोषणा करते हुए इसकी अनुमानित लागत लगभग 45.7 मिलियन डॉलर बताई थी।
साथ ही कहा था कि भारत ने 100 एफजीएम-148 जैवलिन राउंड ‘फ्लाई-टू-बाय’ मूल्यांकन के लिए एक अतिरिक्त जैवलिन मिसाइल और 25 जैवलिन लाइटवेट कमांड लांच यूनिट की मांग की थी।
सौदे के पैकेज में ट्रेनिंग उपकरण, मिसाइल सिमुलेशन राउंड, बैटरी कूलेंट यूनिट, टेक्निकल मैनुअल, लाइफसाइकिल सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और सिस्टम इंटीग्रेशन और टेस्टिंग सभी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने जैवलिन देने के प्रस्ताव को सही ठहराते हुए कहा था कि अमेरिका का साझेदार भारत इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
साथ ही यह प्रस्तावित बिक्री भारत की मौजूदा तथा भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाएगी और क्षेत्रीय खतरों को रोकेगी।
दैनिक जागरण