31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिखों पर हुए बड़े पैमाने के दंगों की पूरी कहानी। सज्जन कुमार, जगदीश टायटलर का जिक्र, आधिकारिक आंकड़े और RSS स्वयंसेवकों द्वारा सिखों को बचाने की घटनाएँ।
06 नवंबर, 2026 – 1984 सिख नरसंहार: 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 से 5 नवंबर तक दिल्ली और कई अन्य जगहों पर सिखों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। कई सिख मारे गए, घर और दुकानें जलाई गईं। दिल्ली में तो सिखों को जिंदा जलाने की घटनाएं सामने आईं। कांग्रेस के नेता इसमें दोषी ठहराए गए। कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर की सहभागिता रही। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में करीब 2700 सिख मारे गए। उस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने सिखों को बचाने के लिए कार्य किया। स्वयंसेवकों ने कई सिखों को बचाया था।
हिंसा कैसे शुरू हुई
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता मिले। रिपोर्टों में कहा गया कि उन्होंने सिखों को सबक सिखाने की बात कही। पार्टी के कार्यकर्ताओं को जुटाया गया। झुग्गी-झोपड़ियों और आसपास के गांवों से लोगों को बुलाया गया। सिखों के घर और दुकानें चिह्नित की गईं। ट्रक, लोहे की छड़ें, मिट्टी का तेल और पेट्रोल जुटाया गया।
1 नवंबर सुबह से दिल्ली में हिंसा शुरू हो गई। भीड़ गुरुद्वारों और सिख बस्तियों की ओर बढ़ी। रकब गंज साहिब गुरुद्वारे पर भी हमला हुआ। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस नेताओं कमलनाथ और वसंत साठे का नाम भीड़ के पास होने का जिक्र है।
सज्जन कुमार और जगदीश टायटलर का जिक्र
गवाहों के बयानों के मुताबिक, 1 नवंबर सुबह सज्जन कुमार पालम कॉलोनी, किरण गार्डन और सुल्तानपुरी जैसे इलाकों में दिखे। एक गवाह राज कुमार ने बताया कि सज्जन कुमार जीप में थे और उनके पीछे भीड़ थी। नारे लगे जैसे “सरदारों को मार दो” और “इंदिरा गांधी हमारी मां हैं, इन्होंने ही मारा है”।
5 नवंबर को एक घटना का जिक्र पत्रकार सुदीप मजूमदार ने किया। पुलिस कमिश्नर एस.सी. टंडन पत्रकारों से बात कर रहे थे कि कोई कांग्रेस नेता दबाव नहीं डाल रहा। तभी जगदीश टायटलर कमरे में आए और बोले कि उनका काम क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनके आदमियों को हिरासत में रखने से राहत कार्य रुक रहा है।
राजीव गांधी का बयान
19 नवंबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा, “इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कुछ दंगे हुए। लोग बहुत गुस्से में थे। जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो उसके आसपास की जमीन हिलना स्वाभाविक है।”
RSS कार्यकर्ताओं की मदद का जिक्र
इस दौरान कुछ सिख परिवारों को RSS के स्वयंसेवकों ने शरण दी और बचाया। लेखक खुशवंत सिंह ने लिखा कि RSS ने हिंदू-सिख एकता बनाए रखने में सम्मानजनक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस (आई) के नेताओं ने भीड़ को उकसाया और तीन हजार से ज्यादा लोग मारे गए। RSS और बीजेपी ने हिम्मत दिखाई और बेबस सिखों की रक्षा की। अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कुछ जगहों पर टैक्सी ड्राइवरों की मदद की। कुछ जीवित बचे लोगों ने बताया कि स्वयंसेवकों ने घरों के बाहर पहरा दिया, परिवारों को छिपाया और सुरक्षित जगह पहुंचाया।
सालों बाद अदालती कार्रवाई
बाद में मामलों की फिर से जांच हुई। दिल्ली की अदालत ने 25 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को सरस्वती विहार में पिता-पुत्र की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी। जगदीश टायटलर पर भी सीबीआई ने 2023 में आरोप तय किए। एडवोकेट एच.एस. फूलका ने कहा कि 1984 की हिंसा कांग्रेस के नेतृत्व वाली थी। आम हिंदुओं ने कई जगह सिखों को बचाने की कोशिश की।
पांचजन्य