20 फरवरी, 2026 – नई दिल्ली : यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई को सुरक्षित और समावेशी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि एआई इंसानों की जगह न ले और बच्चों के लिए सुरक्षित हो। उन्होंने एआई के विकास के लिए 3 अरब डॉलर के ग्लोबल फंड की मांग भी की।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस गुरुवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए। उन्होंने अपने भाषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की चुनौतियों को लेकर चेतावनी दी। गुटेरेस ने कहा कि एआई को इंसानों की जगह नहीं लेनी चाहिए। इसके बजाय एआई को इंसानी क्षमता बढ़ाने में मदद करनी चाहिए। एआई के खतरे को लेकर उन्होंने कहा, हमें श्रमिकों में निवेश करना चाहिए, ताकि एआई इंसानी क्षमता को बढ़ाए, उसे प्रतिस्थापित न करे।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन पर उन्होंने एआई के विस्तार से उत्पन्न होने वाली सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक समस्याओं से निपटने की अपील की। उन्होंने कहा, असली इम्पैक्ट का मतलब है ऐसी तकनीक जो जिंदगी को बेहतर बनाए और धरती की रक्षा करे। आइए, डिफॉल्ट सेटिंग के रूप में गरिमा के साथ सबके लिए एआई बनाएं।
ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण पर असर के बारे में उन्होंने कहा, जैसे-जैसे एआई की ऊर्जा और पानी की मांग बढ़ रही है, डेटा सेंटर और सप्लाई चेन को स्वच्छ ऊर्जा पर स्विच करना चाहिए, न कि इसका बोझ कमजोर समुदायों पर डालना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई सभी के लिए सुरक्षित होना चाहिए। इसके लिए लोगों को शोषण, हेरफेर और दुरुपयोग से बचाना जरूरी है।
बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर जारी विवाद के बीच एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, किसी भी बच्चे को अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। गुटेरेस ने कहा, एआई सभी का होना चाहिए। बिना निवेश के कई देश एआई के दौर से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने एआई पर एक वैश्विक फंड की अपनी मांग दोहराई और कहा, हर जगह बुनियादी क्षमता विकसित करने के लिए कौशल, डेटा, सस्ती कंप्यूटिंग शक्ति और सबको साथ लेकर चलने वाले इकोसिस्टम की जरूरत है।
उन्होंने एआई वैश्विक फंडिंग के लिए इस बार तीन बिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया और कहा कि तीन बिलियन डॉलर किसी एक टेक कंपनी के सालाना राजस्व के एक प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि यह एआई विस्तार की एक छोटी कीमत है जिससे सभी को फायदा होता है, जिसमें एआई बनाने वाले व्यवसाय भी शामिल हैं। सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट हर साल 305 बिलियन डॉलर कमाती है।
गुटेरेस ने कहा कि हालांकि एआई असमानता को गहरा कर सकता है, पूर्वाग्रह को बढ़ा सकता है और नुकसान को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो इसमें मानवता को बेहतर बनाने की अपार क्षमता है।
अमर उजाला