विदेश मंत्रालय ने बताया पूरा प्लान; पड़ोसी देश में खलबली
भारत ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजने की अपनी नीति को फिर से मजबूत किया है, जिसमें विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश से सहयोग की अपील की है।
08 मई, 2026 – नई दिल्ली : बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश को लेकर भारत की नीति में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि केंद्र व राज्य स्तर पर बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों के विरुद्ध रुख और सख्त हो सकता है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों को वापस भेजने के मुद्दे को एक बार फिर मजबूती से उठाया और कहा कि वह इनकी वापसी में तेजी दिखाए। यह पहल बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की हालिया टिप्पणियों के जवाब में हुई है, जिनमें बंगाल चुनाव के बाद ‘पुशबैक’ की आशंका जताई गई थी। वैसे बांग्लादेश में फरवरी, 2026 में तारिक रहमान की बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत द्विपक्षीय संबंधों में गर्मजोशी लाने की कोशिश कर रहा है।
5 साल से पेंडिंग हैं मामले
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब बांग्लादेश के विदेश मंत्री के बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘इन टिप्पणियों को भारत से गैरकानूनी बांग्लादेशियों को वापस भेजने के मुख्य मुद्दे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके लिए बांग्लादेश से सहयोग की जरूरत है। बांग्लादेश में राष्ट्रीयता सत्यापन के 2862 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से कुछ तो पांच वर्ष से भी अधिक समय से हैं।
हमारी नीति है कि भारत में रह रहे सभी गैरकानूनी विदेशी नागरिकों को हमारे कानूनों, प्रक्रिया और तय द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के अनुसार वापस भेजा जाए। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश अपने नागरिकों की राष्ट्रीयता सत्यापन में तेजी लाएगा ताकि अवैध तरीके से रहने वालों को आसानी से वापस भेजा जा सके।
अवैध प्रवासियों को लेकर सरकार सख्त
‘विदेश मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि अवैध प्रवासियों को वापस लेने में बांग्लादेश सरकार का रवैया हमेशा से काफी ढीला रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत का समर्थक माना जाता था, लेकिन उनके कार्यकाल में भी भारत की तरफ से अवैध आव्रजन से जुड़े मामले भेजे जाते थे, लेकिन उन पर कोई जवाब नहीं आता था।
पिछले पांच वर्षों में भारत ने जितने भी मामले सत्यापन के लिए भेजे, वहां से कोई जवाब नहीं आया। कई मामलों में अवैध बांग्लादेशी नागरिक जेल की सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीयता सत्यापन नहीं होने के कारण उन्हें वापस नहीं भेजा जा सका। यह मुद्दा लंबे समय से भारत-बांग्लादेश संबंधों का संवेदनशील पहलू रहा है।
भारत-बांग्लादेश की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई जगहों पर घुसपैठ की शिकायतें आती रहती हैं, खासकर बंगाल और असम में। बंगाल चुनाव में भाजपा ने अवैध घुसपैठ को लेकर सख्त रुख अपनाया और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) तथा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाने का वादा किया।
गृह मंत्रालय का बयान
गृह मंत्रालय ने हाल में अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए नई नीति जारी की है, जिसमें हर जिले में एसटीएफ बनाने और मासिक रिपोर्टिंग का प्रविधान है। भारत का स्पष्ट रुख है कि सभी गैरकानूनी विदेशी नागरिकों को कानून के अनुसार वापस भेजा जाएगा, लेकिन इसमें बांग्लादेश का सक्रिय सहयोग जरूरी है।
तारिक रहमान सरकार से संबंध सुधारने की कोशिश के बावजूद अवैध प्रवासन का मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा का प्रमुख बिंदु बना हुआ है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के तहत ही निर्वासन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
तीस्ता नदी के मुद्दे पर बांग्लादेश के चीन से बात करने से जुड़े सवाल पर जायसवाल ने कहा, ‘भारत और बांग्लादेश 54 नदियां साझा करते हैं। हमारे पास पानी से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए व्यवस्थित द्विपक्षीय तंत्र हैं और ये तंत्र नियमित अंतराल पर बैठक करते रहते हैं।’
दैनिक जागरण