Switzerland Talk: नजम सेठी ने कार्यक्रम में आगे कहा कि कतर के प्रधानमंत्री भी स्विट्जरलैंड जा रहे हैं और इसीलिए मोहसिन नकवी भी स्विट्जरलैंड चले गये हैं। नकवी इसलिए गये हैं ताकि पाकिस्तान की अहमियत को दिखाया जा सके।
22 जून, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान उम्मीद लगाए बैठा था कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता इस्लामाबाद में होगी। लेकिन दोनों देशों ने पाकिस्तान को किनारे कर स्विट्जरलैंड को बैठक के लिए चुना है। इसे लेकर पाकिस्तान में गहरी निराशा है। खासकर पाकिस्तानी सेना और सरकार के पीट्ठू पत्रकारों और एक्सपर्ट्स की। पाकिस्तानी सेना के ‘गुलाम’ और प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर एक्सपर्ट नजम सेठी का आखिरकार दर्द झलक पड़ा है।
उन्होंने कहा है कि ‘कतर के लिए ईरान ने पाकिस्तान को क्रेडिट देने से मना कर दिया।’ हालांकि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर फिर भी स्विट्जरलैंड गये हैं और इसके पीछे वजह है कि जो भी बचा खुचा क्रेडिट है वो भी पाकिस्तान के हाथ से नहीं निकले।
‘पैसों के लिए ईरान ने पाकिस्तान को किया किनारे’
नजम सेठी ने एक कार्यक्रम में कहा ‘कतर कोशिश कर रहा था कि युद्धविराम करवाने में उसका भी रोल हो और मेरा ख्याल है कि ईरान भी जो है वो भी सोचता है कि आगे की जो स्थिति होगी जो पैसों की होगी, उसमें कतर ज्यादा बड़ा रोल निभा पाएगा बजाए की पाकिस्तान के। इसीलिए ईरान जो है वो अब कतर को ज्यादा भाव दे रहा है।’ नजम सेठी ने आगे कहा ‘कतर ही है जिसके जरिए जिस 300 अरब डॉलर की बात हो रही है कि ईरान को दिए जाएंगे वो शायद मिल सकते हैं। ईरान के भी 6 अरब डॉलर की संपत्ति कतर के अंदर फ्रीज हो रखी है। इसीलिए कतर जो है वो अपना पैसा दिखा रहा है और ईरान उसकी तरफ झुका हुआ है।’
नजम सेठी ने कार्यक्रम में आगे कहा कि कतर के प्रधानमंत्री भी स्विट्जरलैंड जा रहे हैं और इसीलिए मोहसिन नकवी भी स्विट्जरलैंड चले गये हैं। नकवी इसलिए गये हैं ताकि पाकिस्तान की अहमियत को दिखाया जा सके। नजम सेठी ने कहा है कि पाकिस्तान जताना चाह रहा है कि हमारी भी भूमिका रही है हम भी बातचीत कर रहे हैं, हम भी समझा रहे हैं। दूसरी तरफ ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के मुख्य प्रतिनिधि होज्जतोलेस्लाम अब्दुल्ला हाजी सादेघी का कहना है कि अमेरिका के साथ ‘बातचीत मुख्य विकल्प नहीं है।’ टेलीग्राम पर एक पोस्ट में सादेघी के हवाले से कहा गया ‘हम ताकत और सावधानी के साथ बातचीत करेंगे लेकिन हम चुपचाप बैठकर तमाशा नहीं देखेंगे।’ जिससे इस बैठक की कामयाबी पर सवाल उठ रहे हैं।
नवभारत टाइम्स