अलगाववादियों ने भारतीय उच्चायुक्त का काफिला रोका, तमाशबीन बनी रही पुलिस
28 मई, 2026 – जालंधर : आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े कट्टरपंथी इंदरजीत सिंह गोसल ने वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले को घेर लिया और तिरंगे का अपमान किया।
कनाडा की धरती पर एक बार फिर भारत विरोधी गतिविधियों ने शर्मनाक रूप ले लिया। वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले को खालिस्तान समर्थकों ने घेर लिया और खुलेआम भारतीय तिरंगे का अपमान किया गया।
प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़ा कट्टरपंथी इंदरजीत सिंह गोसल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे उच्चायुक्त की गाड़ियों के सामने पहुंच गया। उसने भारतीय ध्वज को फाड़ने और पैरों तले रौंदने की कोशिश की। आसपास मौजूद भीड़ भारत विरोधी नारे लगाती रही, जबकि कनाडाई सुरक्षा व्यवस्था तमाशबीन बनी दिखाई दी।
कार्यक्रम में जा रहे थे उच्चायुक्त
घटना उस समय हुई जब भारतीय उच्चायुक्त एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। खालिस्तानी समर्थक पहले से वहां जमा थे और जैसे ही काफिला पहुंचा, माहौल को उग्र बना दिया गया। पुलिसकर्मी बाद में दौड़ते हुए पहुंचे, लेकिन तब तक तिरंगे का अपमान पूरी दुनिया देख चुकी थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गोसल ने अपने इस कृत्य को सही ठहराने की कोशिश करते हुए भारतीय उच्चायुक्त पर ही जान से मारने की साजिश रचने का आरोप लगा दिया। बिना किसी प्रमाण के लगाए गए इन आरोपों को लेकर खालिस्तानी समर्थक लगातार जहर उगलते रहे।
पन्नू का करीबी है गोसल
यह वही इंदरजीत सिंह गोसल है जिसे खालिस्तानी चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू का बेहद करीबी माना जाता है। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उसका नाम लगातार सामने आता रहा है। हिंदू मंदिरों के बाहर हिंसा, धमकी और उग्र प्रदर्शनों में भी उसका नाम जुड़ चुका है।
भारत लंबे समय से कनाडा को चेतावनी देता रहा है कि वहां चरमपंथी तत्वों को खुली छूट मिल रही है। मगर हर बार अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भारत विरोधी ताकतों को संरक्षण मिलता दिखाई देता है।
भारतीय समुदाय में रोष
भारतीय समुदाय में इस घटना को लेकर भारी रोष है। कनाडा निवासी जोगिंदर सिंह का कहना है कि तिरंगे का अपमान केवल एक झंडे का अपमान नहीं, बल्कि पूरे भारत और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं पर हमला है।
भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बाद में कनाडाई संस्थाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत है और उनके नाम पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों का कोई आधार नहीं है।
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि कनाडा में बैठे खालिस्तानी चरमपंथियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और भारत विरोध को वहां राजनीतिक संरक्षण मिलता दिखाई दे रहा है।
अमर उजाला