रजिन्द्र बंसल अबोहर

गलवान में गलबहियाँ करते, चीनी ने धोखा हमें दिया।
छप्पन ईंची सीने अपने, दुश्मन का मस्तिष्क तोड़ दिया।
पैट्रोलिंग गलवान की घाटी में, छल करने सैनिक बौने।
विचलित न भारती वीर हुये, चुन चुन के लगे उनको धोने।
कुछ बहाये गलवान के पानी में,कुछ को वहीं जिन्दा गाड़ दिया।।
गलवान में गलबहियाँ करते————–।।
छल चल न सका उन बौनों का, डण्डे लाठी सब धरे रहे।
रण कौशल वीर जवानों का, चीनी भौचक्के देख रहे।
बलिदान वीर वहां बीस हुये, दुश्मन चालीस को लील लिया।।
गलवान में गलबहियाँ करते————–।।
सन बीस जून की है घटना, हुंकारा वहां अमृतसर पटना।
गुरू गोबिन्द के सिहों संग, महाभारत वाले थे कृष्णा।
चिडियों से बाज तुडाये वहां, और नाग कालिया कील लिया।।
गलवान में गलबहियाँ करते————–।।
हो पाकिस्तानी या हो चीनी, आज सुने यह दुनिया सारी।
यह भारत बीस बीस का है, नहीं बासठ वाली लाचारी।
उसे घर में घुस के मारेंगे, जिस जिस ने हमसे दगा किया।।
गलवान में गलबहियाँ करते————–।।
test