पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 15 सितंबर से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी शुरू की थी और 3 नवंबर तक गुरदासपुर में पराली जलाने के 108 मामले सामने आए हैं जबकि पिछले साल इस अवधि के दौरान इससे आधे मामले सामने आए थे।
05 नवंबर, 2026 – चण्डीगढ़-पंजाब : पंजाब में पराली जलाने की मामलों में हो रही बढ़ोतरी ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सूबे के चार और जिले पराली जलाने के नए हॉटस्पॉट बनकर सामने आए हैं। गुरदासपुर, कपूरथला, फिरोजपुर और संगरूर में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। यही कारण है कि आयोग ने मंगलवार को गुरदासपुर और कपूरथला के डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी को पराली जलाने के मामलों में वृद्धि के चलते कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अब राज्य सरकार के सामने भी इन जिलों में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने की बड़ी चुनौती है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 15 सितंबर से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी शुरू की थी और 3 नवंबर तक गुरदासपुर में पराली जलाने के 108 मामले सामने आए हैं जबकि पिछले साल इस अवधि के दौरान इससे आधे मामले सामने आए थे। सरकार ने 19 किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की है और साथ ही 58 नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
कपूरथला में पराली जलाने की 112 घटनाएं सामने आ चुकी हैं जो पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा है। विभाग ने 31 किसानों के राजस्व रिकाॅर्ड में एंट्री की और 16 अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया गया है लेकिन आयोग इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। यही कारण है कि वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। अगर बाकी जिलों की बात करें तो फिरोजपुर 305, संगरूर 154 और बठिंडा में 148 मामले दर्ज किए गए हैं।
80 फीसदी से ऊपर कटाई का काम पूरा
प्रदेश में 32.87 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और 80 फीसदी से ऊपर फसल की कटाई का काम पूरा हो चुका है। बठिंडा, बरनाला, फाजिल्का, मोगा और संगरूर में धान की कटाई का काम अभी अधिक बाकी है। यही कारण है कि सरकार की तरफ से इन जिलों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि पराली जलाने की घटनाओं को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
खन्ना का एक्यूआई 256 तक पहुंचा
सूबे में पराली की जलाने की घटनाओं में वृद्धि का असर हवा पर भी दिखना शुरू हो गया है। कुछ क्षेत्रों की हवा खराब श्रेणी में भी चली गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में खन्ना का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सबसे अधिक 256 दर्ज किया गया है। इसी तरह पटियाला 191, जालंधर 181, मंडी गोबिंदगढ़ 151, लुधियाना 150 और अमृतसर का एक्यूआई 123 दर्ज किया गया है। सिर्फ रूपनगर ही 58 एक्यूआई के साथ संतोषजनक श्रेणी में है।
अमर उजाला