साल 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक हमजा बुरहान की शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
25 मई, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान में आतंकियों को सरकारी पनाह की बात एक बार फिर दुनिया के सामने साफ हुई है। पाकिस्तान कहता रहा है कि उसकी जमीन पर कोई आतंकी नहीं है लेकिन अल बद्र कमांडर हमजा बुरहान के जनाजे की तस्वीरों से साफ हो गया है कि वह वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है। कई आतंकी शुक्रवार को इस्लामाबाद में आतंकवादी हमजा बुरहान के जनाजे में शामिल हुए हैं, जिसकी अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी। भारी भरकम सुरक्षा और पाबंदियों के बावजूद इनकी तस्वीरें सामने आ गई हैं।
हमजा बुरहान के अंतिम संस्कार की कई तस्वीरें सामने आई हैं। इनमें हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल बद्र चीफ बख्त जमीन खान दिख रहे हैं। हमजा के जनाजे में सुरक्षा के भारी इंतजाम देखे गए। इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी सरकार के सरंक्षण में हमजा को दफ्न किया गया। साथ ही पाकिस्तान के दो कुख्यात आंतकियों- सैयद सलाहुद्दीन और बख्त खान को पनाह देने से भी पर्दा हट गया है।
हमजा पर अज्ञात बंदूकधारियों का हमला
हमजा बुरहान (कोडनेम डॉक्टर) था, मुज़फ्फराबाद में मारा गया था। अज्ञात बंदूकधारियों ने एक शिक्षण संस्थान के बाहर उस पर गोलियां चला दी थीं। बताया जाता है कि वह वहां एक आम नागरिक की पहचान के साथ प्रिंसिपल के तौर पर काम कर रहा था। बुरहान के सिर में कई गोलियां लगी थीं और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
हमजा की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में भारी भीड़ देखी गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में जनाजे में शामिल होने वाले आतंकियों के साथ भारी हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी तैनात थे। अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान ऐसे लोगों के आने की भी चर्चा है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े हुए हैं।
पुलवामा का रहने वाला था हमजा
कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला बुरहान कई साल पहले सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया था। वह प्रतिबंधित संगठन अल-बद्र से जुड़ा और उसका एक अहम चेहरा बन गया। भारत के गृह मंत्रालय ने 2022 में उसे ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया था।
बुरहान कश्मीरी युवाओं को निशाना बनाकर भर्ती मॉड्यूल और सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों के लिए साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) उपलब्ध करा रहा था। उस पर सबसे गंभीर आरोप 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले की योजना बनाने और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का था। इस हमले में CRPF के 40 जवानों की जान गई थी।
नवभारत टाइम्स