5 लाख नौकरियों का वादा रह गया अधूरा
पाकिस्तान के निवेश मंत्री कैसर अहमद शेख ने स्वीकार किया है कि 2018 से 2024 के बीच पाकिस्तान करीब आठ अरब डॉलर के विदेशी निवेश से हाथ धो बैठा। इतना ही नहीं, करीब पांच लाख औद्योगिक नौकरियों का मौका भी गंवा दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह निवेश मुख्य रूप से चीन से आने वाला था।
09 मई, 2026 – नई दिल्ली : पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था और खोखले दावों की सच्चाई अब उसके अपने मंत्री ही उजागर करने लगे हैं। पाकिस्तान के निवेश मंत्री कैसर अहमद शेख ने स्वीकार किया है कि 2018 से 2024 के बीच पाकिस्तान करीब आठ अरब डॉलर के विदेशी निवेश से हाथ धो बैठा।
इतना ही नहीं, करीब पांच लाख औद्योगिक नौकरियों का मौका भी गंवा दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह निवेश मुख्य रूप से चीन से आने वाला था। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इसे पाकिस्तान की लगातार विफल सरकारों की नाकामी बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी सीपेक को पाकिस्तान ने कभी अपनी अर्थव्यवस्था का गेम चेंजर बताया था, लेकिन वर्षों बाद भी यह परियोजना पाकिस्तान के लिए विकास से ज्यादा कर्ज और विफलता की पहचान बनती जा रही है।
जरूरी ढांचा ही तैयार नहीं कर पाया
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने चीन से अरबों रुपये का कर्ज लेकर सड़कें, ऊर्जा और परिवहन परियोजनाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन उद्योगों के लिए जरूरी ढांचा ही तैयार नहीं कर पाया। चीन की कंपनियों को बसाने के लिए बनाए जाने वाले विशेष आर्थिक क्षेत्र आज भी अधूरे पड़े हैं।
एक दशक बीतने के बाद भी केवल चार विशेष आर्थिक क्षेत्र ही योजना के स्तर से थोड़ा आगे बढ़ पाए। यही वजह रही कि चीन की निजी कंपनियों ने पाकिस्तान में उद्योग लगाने से दूरी बना ली।
पाकिस्तान चाहता था कि चीनी कंपनियां वहां कारखाने लगाकर दुनिया भर में निर्यात करें और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जो कुछ कंपनियां पहुंचीं भी, उन्होंने निर्यात आधारित उद्योग लगाने के बजाय केवल पाकिस्तान के स्थानीय बाजार में सामान बेचने को प्राथमिकता दी।
पाकिस्तान अवसर गंवाता चला गया
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि पाकिस्तानके नीति निर्माता हर बार उद्योगों को दूसरे चरण का सपना बताकर टालते रहे। नतीजा यह हुआ कि निवेशकों का भरोसा लगातार टूटता गया और पाकिस्तान अवसर गंवाता चला गया।
रिपोर्ट में पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा गया कि चीन में बढ़ती लागत और वैश्विक आपूर्ति चेन में बदलाव के कारण पाकिस्तान के पास अभी भी उद्योग आकर्षित करने का छोटा मौका है, लेकिन यह केवल भाषणों और खोखली घोषणाओं से नहीं मिलेगा।
वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों ने स्थिर नीतियों, बेहतर माहौल और मजबूत औद्योगिक ढांचे के दम पर विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर लिया, जबकि पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था में उलझा रह गया। यही कारण है कि चीन जैसा करीबी सहयोगी भी अब पाकिस्तान में बड़े निवेश से कतराने लगा है।
दैनिक जागरण