हत्या के मामले में देश में दूसरे नंबर पर लुधियाना, NCRB की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना 2024 में हत्या के मामलों में देश के बड़े शहरों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।
16 मई, 2026 – लुधियाना : पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना में बढ़ते हिंसक अपराध अब कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। सड़क हादसों के बाद अब हत्या के मामलों में भी शहर का रिकॉर्ड चिंताजनक हो गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में हत्या के मामलों में लुधियाना देश के बड़े शहरों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। एनसीआरबी ने देश के 34 बड़े शहरों के अपराध आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि 2024 के दौरान लुधियाना में हत्या के 56 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुल 58 लोगों की मौत हुई।
मृतकों में 44 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल हैं। हत्या के मामलों में फरीदाबाद 79 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि 56 मामलों के साथ लुधियाना दूसरे स्थान पर पहुंच गया। आगरा 53 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में शहर में 58 हत्या के मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 और 2024 में यह आंकड़ा 56 पर स्थिर रहा। आंकड़ों में मामूली गिरावट जरूर दिखी, लेकिन लगातार ऊंचा स्तर शहर में बढ़ती हिंसा और आपराधिक प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात हत्या के कारणों को लेकर सामने आई। एनसीआरबी के मुताबिक, शहर में सबसे अधिक हत्याएं पुरानी रंजिश और मामूली विवादों के कारण हुईं। 19 हत्या के मामले झगड़े और छोटे विवादों से जुड़े रहे। 14 हत्याएं पुरानी रंजिश के चलते हुईं। 8 मामलों में अवैध संबंध हत्या की वजह बने। एक मामला गैंगवार से जुड़ा पाया गया। 6 मामलों की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी।
आयु वर्ग के आधार पर भी रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर पेश की है। हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा शिकार 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग बने। इस वर्ग में 26 लोगों की जान गई, जिनमें 18 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल थीं। वहीं, 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग में 18 लोगों की हत्या हुई, जबकि 45 से 60 वर्ष वर्ग में 12 लोगों की जान गई।
रिपोर्ट में 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की एक नाबालिग लड़की के हत्या का शिकार बनने का भी जिक्र है। एनसीआरबी रिपोर्ट ने लुधियाना में बढ़ते अपराध और हिंसक घटनाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि हत्या के बढ़ते ग्राफ पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाई जाती है।
दैनिक जागरण