भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा
मई 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया। खाड़ी संकट और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर ली है।
21 मई, 2026 – खाड़ी संकट के बीच तेल की सप्लाई बंद होने से दुनियाभर में दिक्कतें हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन भारत सरकार इससे निपटने के लिए लगातार दूसरे माध्यमों से तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने में लगा है। इसी के तहत भारत रूस से तेल आय़ात कर कर रहा है। इस माह भारत ने मई महीने में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल खरीदा है। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का हमारे आयात प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम अपनी जरूरत के अनुसार तेल खरीदते रहेंगे।
मई में रिकॉर्ड आयात
भारत ने मई में रूस से औसतन 23 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात कर चुका है। यह अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। डेटा एजेंसी केपलर के अनुसार, पूरे महीने का औसत भी करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत का रुख इस मामले में शुरू से ही साफ रहा है। हम अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीद रहे थे, छूट के दौरान भी खरीदा और आगे भी जारी रखेंगे। सरकार ने पहले ही देश की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है, इसलिए क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं है।
अमेरिका की छूट और नई राहत
अमेरिका ने मार्च में भारत जैसे देशों को रूस से तेल खरीदने की विशेष छूट दी थी, जो 16 मई तक बढ़ाई गई थी। इसका मकसद था कि दुनिया भर में तेल के दाम न बढ़ें और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बनी रहे। अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने फिर से समुद्र में फंसे रूसी तेल के जहाजों से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का अस्थायी लाइसेंस जारी कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट का कहना है कि इससे बाजार को स्थिर रखने और ऊर्जा की जरूरत वाले देशों तक तेल पहुंचाने में मदद मिलेगी।
घरेलू बाजार और महंगाई
भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को बताया था कि वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच तेल की सप्लाई बनाए रखना हमारी पहली प्राथमिकता है। अगर सप्लाई रुकती है तो इसका असर आम लोगों पर पड़ सकता है । LPG जैसी चीजों की कमी और महंगाई बढ़ सकती है।
पिछले महीनों का आंकड़ा
पिछले साल नवंबर में ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोज़नेफ्ट पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था। लेकिन फरवरी में यह फिर बढ़कर 30% तक पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिकी छूट की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही रूस से तेल की खरीद तेज कर दी थी। इससे मई में आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
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