रोज सामने आ रहे हैं इतने मरीज, लुधियाना सबसे अधिक प्रभावित
आर्थिक रूप से संपन्न होने के बाद भी दोनों राज्यों में क्यों तेजी से फैल रहा है क्षयरोग का संक्रमण? स्वास्थ्य विभाग की चौंकाने वाली रिपोर्ट।
21 मई, 2026 – Punjab Haryana TB Cases Increasing Report : क्या कोई राज्य आर्थिक और खान-पान के मामले में पूरी तरह समृद्ध होकर भी किसी जानलेवा संक्रामक बीमारी का गढ़ बन सकता है? पंजाब और हरियाणा से आ रहे स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े इसी कड़वी हकीकत की गवाही दे रहे हैं।
पौष्टिक खुराक की दृष्टि व आर्थिक रूप से संपन्न राज्य होने के बावजूद पंजाब और हरियाणा में क्षयरोग (टीबी) का खतरा लगातार बढ़ रहा है। केवल पंजाब की बात करें तो पिछले पांच साल में राज्य में टीबी मरीजों की संख्या में 22 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। स्थिति यह है कि राज्य में प्रतिदिन औसतन 165 लोग टीबी रोग की चपेट में फंस रहे हैं।
पंजाब में साठ हजार से पार पहुंचे टीबी मरीज: लुधियाना, जालंधर और अमृतसर सबसे संवेदनशील
पंजाब में 60 हजार के करीब नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 17 मई को जारी रिपोर्ट में इस संबंधी जानकारी मिली है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पंजाब में 61,360 टीबी मरीज दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 59,020 थी। इससे पहले 2023 में 55,224, 2022 में 55,150 और 2021 में 50,142 मरीज सामने आए थे। 2025-26 में यह आंकड़ा साठ हजार पार कर चुका है।
लगातार बढ़ते आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि टीबी मुक्त अभियान का लक्ष्य फिलहाल दूर होता नजर आ रहा है। राज्य के पांच जिले लुधियाना, जालंधर, बठिंडा, पटियाला और अमृतसर टीबी के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।
यहां सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीजों की भी निगरानी की जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा टीबी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब में 9,822 घरेलू संपर्क में से 2,383 लोगों का उपचार शुरू किया गया। इससे अभिप्राय यह है कि यदि परिवार में किसी एक व्यक्ति को टीबी है तो उसके समूह स्वजन की जांच की गई और टीबी संक्रमित पाए जाने पर उपचार शुरू किया गया है।
एसिम्प्टोमैटिक मरीज बने बड़ी चुनौती: केंद्र से मिलीं 46 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से स्क्रीनिंग तेज
सबसे बड़ी चुनौती ऐसे मरीजों की पहचान है, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इन्हें एसिम्प्टोमैटिक मरीज कहा जाता है। ऐसे मामलों को पकडऩे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चेस्ट एक्स-रे के जरिये स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है। साथ ही मरीजों को इलाज बीच में न छोड़ने को जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि अधूरा इलाज संक्रमण को और खतरनाक बना सकता है।
केंद्र द्वारा 46 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें भेजी गई हैं। इन्हें जिला अस्पतालों में इंस्टाल किया जा चुका है। इन मशीनों से मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पंजाब में 1,08,818 लोगों की एक्स-रे जांच और 30,270 लोगों की सीबी नाट जांच की गई थी।
हरियाणा में पंजाब से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति
पड़ोसी राज्य हरियाणा में टीबी की स्थिति पंजाब से भी ज्यादा चिंताजनक है। वर्ष 2025 में वहां 88,513 और 2024 में 86,635 मरीज दर्ज किए गए। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 14,637 और जम्मू-कश्मीर में 11,959 मामले सामने आए।
हवा के माध्यम से फैलती है यह बीमारी: क्या हैं टीबी के मुख्य लक्षण और बचाव के उपाय?
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह रोग हवा के माध्यम से उस स्थिति में फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है। समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह रोग मृत्यु का कारण भी बन सकता है। टीबी के लक्षणों में लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना और थकान शामिल हैं।
पंजाब का लुधियाना सर्वाधिक प्रभावित
लुधियाना सर्वाधिक प्रभावित पंजाब में टीबी के नए मामलों का वितरण जिलेवार देखा जाए तो लुधियाना सबसे अधिक प्रभावित जिला है। यहां इस वर्ष 13,106 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं। इसके बाद अमृतसर 4,325, जालंधर 3,164 और पटियाला में 3,027 नए मरीज मिले हैं। बठिंडा, होशियारपुर, संगरूर, मोहाली आदि के मामले मिलाकर राज्य में कुल 60,744 नए टीबी मरीज दर्ज किए गए हैं।
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