भारत से संबंधों पर शहबाज शरीफ को लताड़ा
Pakistan : पाकिस्तान के वरिष्ठ धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजल-उर-रहमान ने सेना और सत्ता प्रतिष्ठान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि स्वात से लेकर बलूचिस्तान तक कई सैन्य अभियान चलाए गए, लेकिन आतंकवाद खत्म नहीं हुआ. मौलाना ने पाकिस्तान की सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीतिक व्यवस्था को भी विफल बताया.
10 जून, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान में बढ़ती आतंकी घटनाओं और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच सरकार और सेना पर सवाल उठने लगे हैं. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) के प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान ने एक बार फिर पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि जब देशभर में इतने बड़े-बड़े सैन्य अभियान चलाए गए, तो फिर आतंकवाद आज भी क्यों बढ़ रहा है? बलूचिस्तान के पिशिन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए फजल-उर-रहमान ने कहा कि स्वात से लेकर बलूचिस्तान तक सेना ने कई ऑपरेशन किए, लेकिन आतंकवाद खत्म नहीं हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षा देने की मूल जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है.
भारत-अफगानिस्तान पर क्या कहा?
मौलाना ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हालात इतने खराब हैं कि कोई पुलिस थाना, सैन्य चेकपोस्ट या फ्रंटियर कॉर्प्स का किला पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की मौजूदा सुरक्षा नीति की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है. हाल के महीनों में दोनों प्रांतों में सुरक्षा बलों पर लगातार हमले हुए हैं और कई सैनिकों की जान गई है. फजल-उर-रहमान ने केवल सेना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पूरी हाइब्रिड व्यवस्था को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा नीति और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही हैं. उनके मुताबिक पाकिस्तान क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है. उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के साथ बंद सीमाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि पड़ोसी देशों से व्यापार और संपर्क बढ़ाए बिना आर्थिक विकास कैसे संभव होगा?
चीन भी खुश नहीं?
मौलाना ने दावा किया कि पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार चीन भी सुरक्षा हालात को लेकर असंतुष्ट है. उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़े चीनी नागरिकों और परियोजनाओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे बीजिंग भी नाराज है.
फजल-उर-रहमान ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक इंजीनियरिंग ने समाज में विभाजन बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि सरकार और संस्थानों को आलोचकों को देशद्रोही कहना बंद करना चाहिए. उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया और मौजूदा संसद की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं.
मौलाना ने कहा कि सुरक्षा खतरों के बावजूद उनकी पार्टी देशभर में अपना राजनीतिक अभियान जारी रखेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें हिंसा के जरिए उनकी पार्टी को डराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन JUI-F पीछे हटने वाली नहीं है.
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