PoK में ‘नीलम-झेलम’ प्रोजेक्ट बर्बाद!
Neelum-Jhelum hydropower Project: शुक्रवार को पाकिस्तान के सीनेटर्स ने देश के सबसे महंगे पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक के फेल होने के पीछे संभावित लापरवाही की जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह नुकसान सिर्फ जियोलॉजिकल स्थितियों की वजह से हुआ या लापरवाही है।
13 जुलाई, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान सिंधु जल संधि को रोकने और पानी संकट के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करता है लेकिन हकीकत ये है कि ये देश खुद अपने पापों से बर्बाद होगा। पाकिस्तान का लगभग 500 अरब का नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कम से कम मार्च 2028 तक के लिए बंद हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का अंडरग्राउंड टनल सिस्टम टूटने के कारण यह प्रोजेक्ट लगभग चार साल तक बंद रहेगा। पाकिस्तान ये प्रोजेक्ट PoK में बना रहा है और इसको लेकर काफी विवाद रहे हैं।
इस वजह से उन ग्राहकों पर बोझ पड़ रहा है जिनसे इस प्रोजेक्ट के नाम पर लंबे समय से ज्यादा बिजली बिल वसूला जा रहा था। हैरानी की बात ये है कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर नहीं बल्कि जल संसाधन पर सीनेट की स्थायी समिति की बैठक में इसका खुलासा किया था। जहां वाप्डा (Wapda) के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने बताया कि 969-मेगावाट के हाइड्रोपावर प्लांट की मरम्मत का काम चल रहा है। सिंधु जल विवाद के केन्द्र में ये प्रोजेक्ट रहा है और इसे पाकिस्तान ने भारत के किशनगंगा प्रोजेक्ट के जवाब में शुरू किया था।
पाकिस्तान के ‘नीलम-झेलम’ प्रोजेक्ट फेल!
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद ने भरोसा जताया कि प्रोजेक्ट मार्च 2028 तक फिर से चालू हो जाएगा। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा संभव नहीं हो पाया। फिर भी पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि निर्माण से पहले की गई जियोलॉजिकल स्टडीज में इस इलाके को भूकंप-संवेदनशील ज़ोन के तौर पर पहचाना गया था जबकि टनल के फेल होने की जांच अभी भी जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक गलत सर्वे और गलत इंजीनियरिंग की वजह पहाड़ का एक बड़ा टुकड़ा इसके टनल पर गिर गया जिससे काफी नुकसान पहुंचा है।
पाकिस्तान के सीनेटर्स ने देश के सबसे महंगे पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक के फेल होने के पीछे संभावित लापरवाही की जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह नुकसान सिर्फ जियोलॉजिकल स्थितियों की वजह से हुआ या इसमें डिज़ाइन, निर्माण या ऑपरेशन से जुड़ी कमियों की भी भूमिका थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी लापरवाही की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
फेल होने के कगार पर 5 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को जुलाई 2007 में पाकिस्तान सरकार ने मंजूरी दी थी और अगस्त 2018 में इसका काम शुरू हुआ था। उस समय के हिसाब से ये प्रोजेक्ट करीब 500 अरब का है। 2024 में चट्टान टूटने से इसकी हेडरेस टनल को भारी नुकसान पहुंचा था और उसके बाद से ये प्रोजेक्ट बंज पड़ा है। इससे नेशनल ग्रिड को सस्ती पनबिजली नहीं मिल पा रही है और महंगी थर्मल बिजली पर निर्भरता बढ़ गई है।
द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सांसदों ने कहा कि पाकिस्तान ने तरबेला और मंगला के बाद कोई बड़ा बांध नहीं बनाया है जबकि भारत ने करीब 5,000 बांध बनाए हैं। वहीं लंबे समय तक बंद रहने से पाकिस्तान के पहले से ही बढ़ते ‘सर्कुलर डेट’ (बकाया कर्ज के बोझ) पर और दबाव पड़ा है।
भारत के किशनगंगा के जवाब में ये प्रोजेक्ट बना रहा था पाकिस्तान
पाकिस्तान ने ये प्रोजेक्ट कब्जे वाले कश्मीर में बनाना शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत के साथ विवाद भी रहा है। क्योंकि नीलम नदी (जिसे भारत में किशनगंगा के नाम से जाना जाता है) झेलम की सहायक नदी है इसलिए भारत और पाकिस्तान दोनों ही इसके पानी पर अपना दावा करते रहे हैं। भारत ने अपना किशनगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बनाया जिससे सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के साथ ऐतिहासिक विवाद पैदा हुए कि भारत नीलम-झेलम बेसिन से कितना पानी दूसरी तरफ मोड़ सकता है।
सीमा पर संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत ने डैम के इंफ्रास्ट्रक्चर पर गोलाबारी की और जान-बूझकर उसे नुकसान पहुंचाया। जब भी सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलाबारी होती थी तो पाकिस्तान आरोप लगाता था कि भारतीय सेना जानबूझकर नीलम-झेलम बांध के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रही है ताकि उसका यह प्रोजेक्ट तबाह हो जाए। लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा ऐसे आरोंपों को सिरे से खारिज किया।
पाकिस्तान ने लगाया था बांध पर गोलीबारी करने का आरोप
13 नवंबर 2020 को पाकिस्तान की तरफ से जब संघर्षविराम का बड़ा उल्लंघन किया गया तो उसके जवाब में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी चौकियों और लॉन्च पैड्स पर बेहद आक्रामक जवाबी कार्रवाई की थी। इस गोलाबारी में पाकिस्तान के कई बंकर और चौकियां तबाह हो गई थीं।
इस घटना के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और वहां की मीडिया ने दावा किया कि भारतीय सेना की आर्टिलरी गन के गोले नीलम घाटी में बने इस नीलम-झेलम पनबिजली प्रोजेक्ट (NJHPP) के पावरहाउस और डैम साइट के बेहद करीब आकर गिरे। पाकिस्तान ने तब आरोप लगाया कि भारत जानबूझकर उसके इस 5 अरब डॉलर के संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है ताकि उसका यह मेगा प्रोजेक्ट तबाह हो जाए।
नवभारत टाइम्स