यूरोपीय संसद ने जमकर लगाई फटकार
18 जुलाई, 2026 – पाकिस्तान में ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय की नाबालिग लड़की मारिया शाहबाज़ के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यूरोपीय संसद ने इस मामले पर एक प्रस्ताव पारित करते हुए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है और सरकार से मारिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मारिया शाहबाज़ केवल 13 वर्ष की थीं, जब जुलाई 2025 में उनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। आरोप है कि 30 वर्षीय शहयार अहमद ने उनका जबरन इस्लाम धर्म परिवर्तन कराया और उनसे शादी कर ली।
मारिया के परिवार ने अदालत में आधिकारिक दस्तावेज पेश कर दावा किया कि वह नाबालिग थीं और विवाह से जुड़े दस्तावेजों में भी कथित तौर पर हेरफेर किया गया था। इसके बावजूद पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट ने विवाह को बरकरार रखते हुए मारिया को आरोपी के साथ रहने का आदेश दिया। अदालती फैसले के बाद पाकिस्तान में ईसाई संगठनों, महिला अधिकार समूहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कराची प्रेस क्लब, लाहौर और दक्षिणी पंजाब में प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने “मारिया को न्याय दो” और “जबरन धर्म परिवर्तन बंद करो” जैसे नारे लगाए।
यह मामला विदेशों में बसे पाकिस्तानी ईसाई समुदाय तक भी पहुंचा। नीदरलैंड के ग्रोनिंगन शहर में लोगों ने “Justice for Maria Shahbaz”, “Save Our Daughters” और “Protect Minority Girls in Pakistan” जैसे बैनर लेकर प्रदर्शन किया और यूरोपीय देशों से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील की।बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान की संघीय सरकार ने 37 सदस्यीय परामर्श समिति का गठन किया है, जिसमें कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट चर्च के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह की घटनाओं की समीक्षा कर रोकथाम के उपाय सुझाना है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि केवल समिति बनाना पर्याप्त नहीं है, उसकी सिफारिशों को लागू करना भी जरूरी होगा।
यूरोपीय संसद ने अपने प्रस्ताव में पाकिस्तान से मारिया शाहबाज़ की तत्काल सुरक्षा, परिवार से मिलने का अधिकार, स्वतंत्र कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा कराने तथा मानवाधिकार संगठनों को उनकी स्थिति पर निगरानी की अनुमति देने की भी बात कही गई है। संसद ने कहा कि यह केवल एक लड़की का मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह की व्यापक समस्या का प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि जबरन विवाह के जरिए धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली लगभग 75% लड़कियां हिंदू और 25% ईसाई समुदाय से थीं।
यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान से एक राष्ट्रीय शिकायत तंत्र स्थापित करने की भी मांग की है, जहां अपहृत या जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार हुई लड़कियों के परिवार शिकायत दर्ज करा सकें। इसके साथ सुरक्षित आश्रय, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास कार्यक्रम उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है।प्रस्ताव में पाकिस्तान के GSP+ (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) व्यापार दर्जे का भी उल्लेख किया गया है। यूरोपीय संघ ने संकेत दिया है कि यदि पाकिस्तान मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन नहीं करता, तो उसके विशेष व्यापारिक लाभों की समीक्षा की जा सकती है।
पंजाब केसरी