राज्यसभा में पास हुआ राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक
1971 के पुराने कानून के दायरे में राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया गया है, जिससे इसे राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा मिल गई है।
31 जुलाई, 2026 – नई दिल्ली : राज्यसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक-2026 चर्चा के बाद बुधवार को पारित कर दिया। इस विधेयक में राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है। अब यह विधेयक विचार और पारित होने के लिए लोकसभा भेजा जाएगा। लोकसभा से मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह कानून बन जाएगा।
बुधवार को दोपहर दो बजे राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक-2026 को पारित करने के लिए राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सदस्य डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि पिछले 123 वर्षों से वंदे मातरम् का अपमान किया जाता रहा है। इस गीत से प्रेरणा लेकर देश के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान दिए। विधेयक पर चर्चा के दौरान एआईएडीएमके सदस्य एम. थम्बीदुरई ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन तमिलनाडु सरकार द्वारा ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को तीसरी प्राथमिकता दिए जाने पर उन्हें निराशा है।
थम्बीदुरई ने कहा कि तमिलनाडु में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह गीत तमिल भाषा और संस्कृति की पहचान है, इसलिए राज्य में इसे सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए। चर्चा में बीजू जनता दल की सुलता देव ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि वंदे मातरम को सभी विधानसभाओं में रोजाना गाना चाहिए। संसद की कार्रवाही की शुरुआत भी वंदे मातरम से होनी चाहिए। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, एआईएडीएमके के एम. थंबीदुरई सहित कई भाजपा के कई सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया और विधेयक का समर्थन किया। बाद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले प्रस्तावित विधेयक पर अपनी बात रख रहे थे, तब विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया।
सांस्कृतिक विरासत के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस विधेयक में किया गया संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्ष 1971 में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन के सम्मान को सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए थे। अब वंदे मातरम् के जानबूझकर किए गए अपमान को भी मौजूदा कानून के तहत दंडनीय बनाया जाएगा। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की रचना वर्ष 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1936 में जब जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने, तब उन्होंने वंदे मातरम् को केवल दो अंतरों तक सीमित किया। कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए सुभाष चंद्र बोस ने तिमिर बरन बनर्जी से इस गीत का पूर्ण और गरिमापूर्ण संगीत संस्करण तैयार करने का अनुरोध किया था। 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल के आग्रह पर ओंकारनाथ ठाकुर ने पूर्ण वंदे मातरम् प्रस्तुत किया था, जिससे देश के पहले स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत हुई।
संविधान सभा में राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले वंदे मातरम् को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा। इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने ध्वनि मत से राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक को पारित करने की घोषणा की।
तीन साल तक की जेल
उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम् बिल (राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण संशोधन विधेयक-2026) राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को अपराध घोषित करने और उसे जन गण मन (राष्ट्रगान) के समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करने से संबंधित है। वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या इसका अपमान करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस संशोधन के जरिए 1971 के पुराने कानून के दायरे में राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया गया है, जिससे इसे राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा मिल गई है।
पांचजन्य