हिंदुओं के पास न अधिकार और न ही सुनवाई
पाकिस्तान में कोर्ट से लेकर प्रशासन तक सभी कट्टरपंथी ताकतों से डरते हैं।
17 सितंबर, 2026 – पड़ोसी देश पाकिस्तान यूं तो यह कहता रहता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं को वही अधिकार मिले हैं, जो मुसलमानों को मिले हुए हैं, मगर वहां से आते हुए उदाहरण उसके इस झूठ पर लगातार पानी डालते रहते हैं। हाल ही में जो वीडियो सामने आया है, वह इस झूठ को सारी दुनिया को दिखा रहा है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टंडो अलहयर से एक ऐसा ही वीडियो ने पाकिस्तान की सच्चाई सामने ला दी है। इस वीडियो में दो लड़कियां रो-रो कर गुहार लगा रही हैं कि उन्हें उनके घर भेज दिया जाए, मगर कोर्ट तक इन बच्चियों की बात सुनने से इनकार कर दिया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि सीता और रूपी नाम की दो लड़कियां जिनकी उम्र महज 13 और 14 साल की हैं, और जो कच्छी कोल समुदाय की हैं, उन्हें कोर्ट में अपहरण और जबरन निकाह के मामले में पेश किया गया। इस सुनवाई में उन्होनें यह साफ किया कि वह अपने घर जाना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार में जाना चाहती हैं। और उनकी आवाज, सुरक्षा और अनुमति को सुना जाना चाहिए। उनकी मर्जी के बिना कोई भी फैसला नहीं किया जाना चाहिए। मगर पाकिस्तान में कोर्ट से लेकर प्रशासन तक सभी कट्टरपंथी ताकतों से इस सीमा तक डरते हैं, कि वे कानून का भी सम्मान नहीं कर पा रहे हैं। सिंध प्रांत में शादी की उम्र 18 वर्ष है। जो तस्वीर सामने है, उसमें दिख रहा है कि कैसे इन बच्चियों का निकाह उनसे कई उम्र बड़े पुरुषों के साथ कर दिया गया है। मगर सुनवाई नहीं है। एक और प्रश्न उठता है कि क्या इतनी कम उम्र की लड़कियों के पास यह अधिकार है कि वे अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर सकें?
मगर पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए न ही अधिकार हैं और न ही सुनवाई। उनके साथ बस अत्याचार हो सकते हैं, उनकी बच्चियों के साथ अपहरण और जबरन निकाह हो सकता है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बच्चियां रोती रहीं, मगर परिवार को न्याय देने के स्थान पर बच्चियों को सेफ हाउस भिजवा दिया और अब उनकी उम्र की जांच की जा रही है।
नाबालिग बच्चियों का निकाह कैसे?
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का यह कहना है कि अगर लड़कियां नाबालिग हैं, तो उनकी उम्र को जांच से पहले संज्ञान में लेना चाहिए। कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं, जिनमें पुलिस जाकर अपहरणकर्ताओं से जाकर मिल गए और पीड़ित परिवारों की मदद नहीं करती हैं। कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि अगर उनकी उम्र का सत्यापन हो जाता है तो वह सिंध चाइल्ड मेरिज रीस्ट्रैन्ट एक्ट 2013 के दायरे में आती हैं, और इस एक्ट में साफ लिखा है कि अगर कोई भी बच्चा 18 से कम उम्र का है, तो उसका निकाह नहीं हो सकता है।
आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं
यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अभी तक अमजद सोलंगी और मंसूर सोलंगी पर कोई भी कार्यवाही नहीं की है, जिन्होनें इन लड़कियों का अपहरण किया और जबरन निकाह किया। उन्होनें निकाहनामा तो अदालत में पेश कर दिया, मगर वे लड़कियों की उम्र के आधिकारिक दस्तावेज जमा नहीं कर पाए।
हिन्दू गरीब लड़कियों की उम्र निर्धारण में समस्या
पाकिस्तान से कई रिपोर्ट्स ऐसी आई हैं, जो यह बताती हैं कि गरीब हिन्दू लड़कियों के उम्र का निर्धारण इसलिए कठिन होता है, क्योंकि अधिकतर गरीब लड़कियों का प्रसव घरों मे होता है और उनका पंजीकरण भी नहीं होता है। जब पंजीकरण नहीं होता है तो उम्र के निर्धारण के कागज मौजूद नहीं होते हैं। यही कारण है कि गरीब लड़कियां जो इस जबरन मतांतरण और निकाह का शिकार होती हैं, उनकी सुनवाई के दौरान उन्हें उनके परिवार के हाथों न सौंप कर सेफ हाउस में भेज दिया जाता है और उम्र का निर्धारण हो ही नहीं पाता है। ये तमाम तथ्य लगातार ही कई रिपोर्ट्स में लगातार आते रहे हैं।
लगातार ही कई लड़कियों का अपहरण और जबरन निकाह हो रहा है
ऐसा नहीं है कि सीता और रूपी का उदाहरण ही एक है, बल्कि पाकिस्तान में यह बहुत आम है। हाल ही में कोहली समुदाय की पाँसी नामक लड़की का भी अपहरण कर लिया गया था। उसकी उम्र 14 साल बताई जा रही है। समुदाय के लोगों का कहना है कि उन्होनें पुलिस से भी अनुरोध किया है कि बच्ची की सुरक्षा और वापसी सुनिश्चित की जाए। परंतु ऐसा होगा, इसमें संदेह ही है। यह भी पाकिस्तानी पत्रकार दावा कर रहे हैं कि पिछले दस दिनों में लगभग 6 नाबालिग हिन्दू लड़कियों के अपहरण और जबरन निकाह के मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि ये आँकड़े बढ़ भी सकते हैं और इन आंकड़ों की पुष्टि पुलिस और कोर्ट से भी नहीं हो सकी है। परंतु यह भी बात सच है कि पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों के अपहरण और निकाह के मामले जितने सामने आ पाते हैं, मीडिया और कार्यकर्ताओं के अनुसार उनसे अधिक ही मामले होते होंगे, क्योंकि कई मामले पुलिस में जा ही नहीं पाते हैं।
पांचजन्य
‘हमें घर जाना है…’ पाकिस्तानी कोर्ट के बाहर रोती रहीं 13-14 साल की हिंदू बहनें, धर्मांतरण-निकाह के आरोप से मचा हड़कंप
टंडो अल्लाहयार जिले में 13 और 14 साल की दो बहनों के अपहरण, धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला सामने आया है।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत से सामने आए दो नाबालिग हिंदू बहनों के मामले ने एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। टंडो अल्लाहयार जिले में 13 और 14 साल की दो बहनों के अपहरण, धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि दोनों बच्चियों को उनकी इच्छा के खिलाफ घर से ले जाया गया और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम पुरुषों से निकाह करा दिया गया। मामले की गंभीरता उस समय और बढ़ गई, जब दोनों बहनें अदालत के बाहर अपने माता-पिता के पास लौटने की गुहार लगती दिखाई दी।
10 दिनों में छह लड़कियों के अपहरण का दावा
वहीं, विंगस के अनुसार 9 सितंबर को टंडो अल्लाहयार से 14 वर्षीय हिंदू लड़की पांसी कोहली के कथित अपहरण की जानकारी सामने आई थी। सिंध रेनेसां ने कुछ रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि करीब 10 दिनों में छह हिंदू नाबालिग लड़कियों के कथित अपहरण और धर्म परिवर्तन के मामले सामने आए हैं।