‘शोले’ की साइडकार से ICU बाइक एंबुलेंस तक: DRDO से मिली मंजूरी
18 सितंबर, 2026 – नई दिल्ली : 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को साइडकार वाली मोटरसाइकिल पर दौड़ते देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही साइडकार आने वाले समय में जिंदगी बचाने के काम भी आएगा। पंजाब के रूपनगर जिले के नंगल की एक पारिवारिक कंपनी ने इसी तकनीक को नया रूप देते हुए ऐसी बाइक एंबुलेंस तैयार की है, जो संकरी गलियों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और दूरदराज के गांवों तक मरीजों को तुरंत चिकित्सा सहायता पहुंचाने में मदद कर सकती है।
1976 में शुरू हुआ सफर
नंगल की इंदर ऑटो इंडस्ट्रीज की शुरुआत वर्ष 1976 में मैकिनीकल इंजीनियर वरिंदर पाल सिंह ने की थी। कंपनी ने शुरुआत में मोटरसाइकिल साइडकार और दिव्यांग लोगों के लिए आवागमन से जुड़े साधन बनाने पर ध्यान दिया। आज यही पारिवारिक कारोबार अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर समेत कई देशों तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है। कंपनी के मौजूदा प्रमुख सिमरनजीत सिंह के मुताबिक, उनके पिता का मानना था कि तकनीक का इस्तेमाल समाज की मदद के लिए होना चाहिए और यही सोच आज भी कंपनी के काम का आधार है।
साइडकार से बनी ICU वाली बाइक एंबुलेंस
कंपनी की सबसे खास नई पहल बाइक एंबुलेंस है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि जहां सामान्य एंबुलेंस पहुंचने में मुश्किल महसूस करे, वहां यह छोटा वाहन तेजी से पहुंच सके। इसमें आईसीयू जैसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य अस्पताल पहुंचाने से पहले मरीज को शुरुआती और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। सिमरनजीत सिंह के अनुसार, इस अवधारणा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर संचालन से पहले अलग-अलग राज्यों में परिवहन विभाग से पंजीकरण और अन्य जरूरी मंजूरियां हासिल करना बाकी है।
200 बाइक एंबुलेंस पहले ही दी जा चुकीं
कंपनी अब तक बिना आईसीयू सुविधा वाली करीब 200 बाइक एंबुलेंस तैयार कर चुकी है। इन्हें जमशेदपुर और तेलंगाना में विभिन्न परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया गया है। इससे संकेत मिलता है कि छोटे और तेज आपातकालीन वाहनों की जरूरत केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। खासकर संकरी गलियों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में ऐसे वाहनों की उपयोगिता काफी बढ़ सकती है।
‘शोले’ से लेकर अमेरिका-ब्रिटेन तक साइडकार का सफर
कभी ‘शोले’ के कारण भारतीय दर्शकों के बीच पहचान बनाने वाला मोटरसाइकिल साइडकार आज भारत में भले ही दुर्लभ हो गया हो, लेकिन नंगल की कंपनी ने इसे विदेशों में नई पहचान दिलाई है। कंपनी हर साल करीब 300 हस्तनिर्मित साइडकार विदेशी बाजारों में भेजती है। इन्हें हार्ले-डेविडसन और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी मोटरसाइकिलों के साथ भी लगाया जाता है।
बच्चों के लिए चलता-फिरता स्कूल भी बनाया
नंगल की इस कंपनी का प्रयोग सिर्फ साइडकार और एंबुलेंस तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2012 में कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका के दूरदराज इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए मोटरसाइकिल साइडकार को चलते-फिरते कक्षा के रूप में तैयार किया था। इस परियोजना के तहत 25 ऐसे वाहन उपलब्ध कराए गए। कंपनी पुरानी और दुर्लभ मोटरसाइकिलों तथा स्कूटरों को दोबारा तैयार करने का काम भी करती है।
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