भारत से सटे इलाकों में लगाए ट्रेनिंग कैंप, दिल्ली की बढ़ी चिंता
पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं। इससे खासतौर पर भारत के लिए सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
17 अक्टूबर, 2026 – ढाका : पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह कथित तौर पर बांग्लादेश में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। खासतौर से बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स, चटगांव और कॉक्स बाजार के आसपास के इलाके इनके निशाने पर है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में इनके पैर यहां पड़े और लगातार ये गुट मजबूत हो रहे हैं। यह भारत के लिए सुरक्षा के नजरिए से चिंता का सबब है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन टेरर नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान की कोशिश बांग्लादेश से सटे भारतीय इलाकों में अशांति फैलाने की है।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सीकरी का कहना है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय उन सुरक्षा उपायों को धीरे-धीरे हटा दिया गया, जो पहले उग्रवादी नेटवर्कों पर लगाम लगाते थे। नतीजतन, जो समूह पहले हाशिए पर धकेल दिए गए थे। उन गुटों को अब काम करने के लिए नई जगह मिल गई है।
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों को छूट!
हालिया महीनों में बांग्लादेश में बढ़ते उग्रवाद के कई मामले सामने आए हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण मुफ्ती जसीमुद्दीन रहमानी है। यह कट्टरपंथी मौलवी है, जिसे पहले चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप में जेल भेजा गया था। अमेरिका स्थित काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट ने रहमानी को प्रतिबंधित अल कायदा विचारक अनवर अल अवलाकी का अनुयायी बताया है।
शेख हसीना के खिलाफ 2024 के छात्र विद्रोह के दौरान जेल से छूटने के बाद मई 2025 में एक रैली में रहमानी सामने आया। इस रैली में उसने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को भंग करने और उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उसने अवामी लीग पर बैन के लिए सरकार को धमकाया। इसके बाद अंतरिम सरकार ने 10 मई को अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया।
नई दिल्ली की मुख्य चिंता ढाका और इस्लामाबाद के बीच होने वाले सामान्य व्यापारिक या राजनयिक संबंध नहीं हैं, बल्कि यह है कि कहीं ये संबंध एक ऐसे सुरक्षा सहयोग में न बदल जाएं, जिसका मकसद भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना हो। – पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन
लश्कर चला रहा कैंप
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी नेटवर्कों ने खासतौर से चटगांव हिल ट्रैक्ट्स(CHT) में कैंप बनाए हैं। सूत्रों का दावा है कि अलीकदम में कम से कम दो सक्रिय कैंप चल रहे हैं। इन्हें जमात-उद-दावा से जुड़े पाकिस्तान के पूर्व सैन्यकर्मी चला रहे हैं, जो अपनी शाखा फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन की आड़ में काम कर रहे हैं।
भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए फिक्र बढ़ाती है कि क्योंकि CHT की सीमाएं सीधे त्रिपुरा और मिजोरम से लगती हैं, जबकि चटगांव से बंगाल की खाड़ी तक पहुंच नियंत्रित होती है। इसके अलावा बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों ने कथित तौर पर छह ऐसे उग्रवादियों की पहचान की है, जो नेपाल, पश्चिम बंगाल और उत्तरी बांग्लादेश के रास्ते देश में दाखिल हुए थे।
अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ ट्रिब्यूनल की अपारदर्शी कार्यवाही से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। इससे राजनीतिक प्रतिशोध का एक ऐसा चक्र शुरू हो सकता है, जो लंबे समय में देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाएगा। – पिनाक रंजन चक्रवर्ती
भारत के सामने दुविधा
राजदूत सीकरी का तर्क है कि 1972 से 2024 के बीच सुरक्षा के जो इंतजाम किए गए थे, वे यूनुस के कार्यकाल में कमजोर हुए। ऐसा पाकिस्तान के साथ नीतियों में बदलावों के कारण हुआ। इसने इस्लामाबाद को अपना प्रभाव कायम करने का मौका दिया। इससे 1971 से पहले पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के भूराजनीतिक समीकरणों के तत्व फिर से उभरा है।
एयर वाइस मार्शल कपिल काक (रिटायर्ड) का तर्क है कि भारत रणनीतिक रूप से भविष्य का सही अनुमान लगाने में एक हद तक विफल रहा है। काक कहते हैं कि कहीं ना कहीं गलती हमारी रही है। नई दिल्ली को अब चीन की तरह ही खुफिया जानकारी को अपनी दीर्घकालिक नीति में बेहतर ढंग से शामिल करने की जरूरत है।
नवभारत टाइम्स