अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता का भुगतान पड़ रहा खामियाजा
UAE में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी रहते हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष आठ अरब से अधिक की धनराशि अपने देश भेजी थी। दर्जनों पाकिस्तानियों ने बताया कि उन्हें या तो UAE के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने हिरासत में ले लिया था या फिर उन्हें वहां से काल आई थी।
11 मई, 2026 – इस्लामाबाद : अमेरिका एवं ईरान के बीच मध्यस्थता के कारण पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रिश्तों में खटास पैदा होने लगी हैं। UAE पर ईरानी हमलों की जोरदार शब्दों में निंदा नहीं करने के कारण इस खाड़ी देश ने हजारों शिया पाकिस्तानी कामगारों को अपने यहां से खदेड़ दिया है।
इससे पाकिस्तानियों के लिए रोजगार का एक अहम जरिया खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं पिछले महीने UAE ने पाकिस्तान को दिया गया 3.5 अरब डॉलर का कर्ज भी वापस मांग लिया। यह रकम पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 20 प्रतिशत थी।
UAE में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी रहते हैं
UAE में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी रहते हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष आठ अरब से अधिक की धनराशि अपने देश भेजी थी। दर्जनों पाकिस्तानियों ने बताया कि उन्हें या तो UAE के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने हिरासत में ले लिया था या फिर उन्हें वहां से काल आई थी।
उन्हें कई दिनों तक हिरासत में रखा गया और यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया। फिर उन्हें पाकिस्तानी दूतावास से जारी एक इमरजेंसी ट्रैवल डाक्यूमेंट के जरिये देश से निकाल दिया गया।
100 पाक मजदूरों को हाल के हफ्तों में UAE से निकाल दिया गया
पूर्व सांसद नदीम अफजल ने बताया कि पंजाब प्रांत में उनके जिले के कम से कम 100 मजदूरों को हाल के हफ्तों में UAE से निकाल दिया गया।
शिया समुदाय के नेताओं ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में शिया गांवों में पिछले कुछ हफ्तों में लगभग 900 लोग वापस लौटे हैं।
इस्लामाबाद में रहने वाले एक शिया धर्मगुरु मोहम्मद अमीन शहीदी ने बताया कि उनके संगठन ने UAE से निकाले गए 5000 परिवारों को पंजीकृत किया है। ऐसे कई मामले हैं।
पाकिस्तानी नागरिकों को बड़े पैमाने पर UAE से निकाला जा रहा है
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि इस बात से इनकार किया है कि पाकिस्तानी नागरिकों को बड़े पैमाने पर UAE से निकाला गया है। मंत्रालय ने कहा कि जिन पाकिस्तानियों को निकाला गया है, उन्होंने UAE में कोई न कोई अपराध किया था।
यहां यह उल्लेखनीय है कि UAE में रहने वाले लेबनान व इराक जैसे देशों के शिया समुदाय के लोगों को इस तरह देश निकाले का सामना नहीं करना पड़ा है।
वाशिंगटन स्थित एक रिसर्च इंस्टीट्यूट ‘अटलांटिक काउंसिल’ में दक्षिण एशिया मामलों के सीनियर फैलो माइकल कुगेलमैन का कहना है, ”UAE इस बात से नाराज है कि पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ संबंध अभी भी उतने ही मधुर बने हुए हैं; साथ ही वह उन कदमों से भी नाखुश हैं जो पाकिस्तान ने खुद को ईरान के और करीब लाने के लिए उठाए हैं।”
दैनिक जागरण