2021 का प्रदर्शन, अरविंद केजरीवाल की एंट्री और 22 में AAP
पंजाब के पटियाला में पुलिस ने राज्य विद्युत निगम कार्यालय के बाहर धरना दे रहे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के उत्तीर्ण छात्रों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। लाइनमैन यूनियन के प्रशिक्षु, भर्ती नियमों में संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और सहायक लाइनमैन के लिए नौकरी के नियमितीकरण और अनिवार्य लिखित परीक्षा को हटाने की मांग कर रहे थे।
11 जून, 2026 – चंडीगढ़: 5 जून को पटियाला की तस्वीरें पंजाब में आम आदमी पार्टी के उभार के अहम पलों में से एक के बिल्कुल उलट थीं। पुलिस ने PSPCL और PSTCL मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे अप्रेंटिसशिप लाइनमैन पर लाठीचार्ज किया। 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस घटना से नवंबर 2021 की यादें ताजा हो गईं, जब अरविंद केजरीवाल ने मोहाली में प्रदर्शन कर रहे फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर से मिलने के लिए खुद प्रदर्शन स्थल का दौरा किया था। उस समय, फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर यूनियन की नेता सिप्पी शर्मा, दो अन्य लोगों के साथ, नौकरी की मांग को लेकर 47 दिनों से पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन कर रही थीं।
अरविंद केजरीवाल प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं तक पहुंचने की AAP की कोशिश के तहत वहां पहुंचे थे। लाउडस्पीकर से बात करते हुए केजरीवाल ने सिप्पी शर्मा को अपनी बहन बताया था और उनसे प्रदर्शन खत्म करने का आग्रह किया था। उन्हें भरोसा दिलाया था कि AAP की सरकार बनने पर फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर के लिए नियुक्ति पत्र देना प्राथमिकता होगी। लगभग एक घंटे तक समझाने-बुझाने के बाद, समर्थकों की तालियों के बीच सिप्पी शर्मा नीचे उतरीं।
2021 की घटना का असर 2022 में आया नजर
यह घटना AAP के उस वादे का प्रतीक बन गई कि वह नौकरी, नियमितीकरण और बेहतर काम की स्थितियों के लिए प्रदर्शन करने वालों के साथ खड़ी रहेगी। यह एक ऐसा संदेश था जो पूरे पंजाब में गूंजा और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की शानदार जीत में अहम भूमिका निभाई। चुनाव के तुरंत बाद यह सद्भावना दिखाई दी। पंजाब सिविल सचिवालय में अपने पहले दिन, मुख्यमंत्री भगवंत मान का सरकारी कर्मचारियों ने जोरदार स्वागत किया और उनके आने पर ज़ोरदार तालियां बजाईं। कई कर्मचारियों के लिए, AAP का मतलब अतीत से अलग कुछ नया और यह उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित मांगों पर आखिरकार ध्यान दिया जाएगा।
फिर दोहराया इतिहास, पर इस बार…
असिस्टेंट लाइनमैन के तौर पर भर्ती की मांग कर रहे अप्रेंटिस लाइनमैन के हालिया विरोध-प्रदर्शन ने तब पुलिस कार्रवाई का रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने पटियाला में PSPCL-PSTCL हेडक्वार्टर के एंट्री पॉइंट्स को ब्लॉक कर दिया। इस घटना ने विपक्ष को सरकार द्वारा कर्मचारियों और युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों को संभालने के तरीके पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है।
पंजाब में कर्मचारियों का प्रदर्शन क्यों?
लाइनमैन का विरोध-प्रदर्शन सरकार के सामने मौजूद कई चुनौतियों में से सिर्फ एक है। बेहतर वेतन की मांग को लेकर 1,800 से ज़्यादा आउटसोर्स सेवा केंद्र कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सफाई सेवकों ने चेतावनी दी है कि अगर वेतन संशोधन के बारे में दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए, तो वे फिर से विरोध-प्रदर्शन करेंगे। सरकारी कर्मचारी महंगाई भत्ते के बकाया भुगतान की मांग कर रहे हैं, जबकि कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारी रेगुलराइज़ेशन और वेतन से जुड़े मुद्दों को लेकर नाखुश हैं।
इन विरोध-प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि इनमें से कई समूह 2022 के चुनावों से पहले AAP के सबसे उत्साही समर्थकों में से थे। पार्टी ने अपना कैंपेन उन प्रदर्शनकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं से जुड़ने पर केंद्रित किया था, जिन्हें पिछली सरकारों ने नज़रअंदाज़ किया था।
दोनों घटनाओं में बड़ा अंतर
अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए, भगवंत मान सरकार ने बातचीत, भर्ती की घोषणाओं और कर्मचारी यूनियनों से संपर्क करके स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। फिर भी, चुनौती अभी भी बड़ी है। एक तरफ केजरीवाल का सिप्पी शर्मा को पानी की टंकी से नीचे उतरने के लिए मनाना और दूसरी तरफ़ PSPCL हेडक्वार्टर के बाहर पुलिस का प्रदर्शनकारियों को हटाना, इन दोनों घटनाओं के बीच का अंतर उस पार्टी के राजनीतिक सफ़र को दिखाता है जो कभी विरोध की राजनीति के दम पर आगे बढ़ी थी और अब शासन के दबावों का सामना कर रही है।
आने वाले महीनों में AAP इन समूहों की चिंताओं को कितनी प्रभावी ढंग से दूर करती है, यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि क्या वह उन वोटर्स का भरोसा बनाए रख पाएगी जिन्होंने उसे सत्ता में लाने में मदद की थी।
नवभारत टाइम्स