पढ़ाई के बीच जनगणना ड्यूटी से बढ़ी चिंता; यूनियनों ने सरकार से लगाई गुहार
नए शैक्षणिक सत्र के बीच अध्यापकों को जनगणना ड्यूटी देने से पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ी। शिक्षक यूनियनों ने सरकार से मांग की कि अध्यापकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए।
22 अप्रैल, 2026 – अमृतसर : हेल्थ कार्ड व वोटर संशोधन के काम में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले अध्यापकों पर अब जनगणना की भी जिम्मेदारी आन पड़ी है। 2026-2027 शैक्षणिक सेशन शुरू हुए महज 20 दिन ही हुए है। कि अध्यापकों पर बच्चों को पढ़ाई करवाने के साथ साथ जिला प्रशासन ने जनगणना का बोझ भी डाल दिया है। फिलहाल शिक्षा विभाग से जिला प्रशासन ने 400 से अधिक अध्यापकों की मांग रखी है।
शनिवार 18 अप्रैल को जिला प्रशासन ने ड्यूटी में तैनात किए गए अध्यापकों को जनगणना रिहर्सल में शिरकत करने के लिए हाजिरी लगाने के निर्देश दिए थे। अध्यापकों की बड़ी संख्या जिला प्रशासन के तहसीलदार अमृतसर वन व अमृतसर टू कार्यालय के आगे जुट गई थी। वहां पर कुछ एक अध्यापक अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए मेडिकल रिपोर्ट भी साथ लेकर आए थे।
यूनियनों की सरकार से अपील
इसको लेकर डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट और गवर्नमेंट स्कूल टीचर यूनियन ने पंजाब सरकार व जिला प्रशासन से अपील की है कि वह अध्यापकों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रखे। पहले ही अध्यापकों को वोटर संशाेधन के काम में लगाया गया है। अब यह जनगणना का काम भी थोप दिया गया है। जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा। इसलिए जनगणना के काम में अध्यापकों की बजाय अन्य विभागों के कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए।
डीटीएफ के जिला प्रधान अश्वनी अवस्थी, गुरबिंदर खैरा, राजेश पराशर व गवर्नमेंट स्कूल टीचर यूनियन के वरिष्ठ नेता राकेश धवन व दिनेश शर्मा ने जनगणना के काम में अध्यापकों की ड्यूटी लगाने की आलोचना की है। उक्त नेताओं ने कहा कि अध्यापकों को बीएलओ ड्यूटी के तहत वोटर सूची के संशोधन, मौजूदा समय में एसआईआर का काम व अन्य चुनाव काम के लिए बीएलओ के रूप में बड़ी गिनती में तैनात किया गया है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर
यूनियन नेताओं का कहना है कि यह काम सारा साल चलता रहेगा। जिस कारण अध्यापकों को कई कई दिन स्कूल से बाहर रहना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है। संगठन यह मांग करती है कि अध्यापकों को बीएलओ ड्यूटी से तुरंत प्रभाव से मुक्त किया जाए।
जनगणना 2026 में बड़े स्तर पर अध्यापकों को लगाया गया है। यूनियन नेताओं ने मांग की है कि इस काम के लिए साक्षर बेरोजगार युवकों की सेवाएं ली जाए ताकि स्कूलों का काम प्रभावित न हो। पंजाब सरकार की ओर से सेहत स्कीम में बनाए जा रहे हेल्थ कार्ड में भी अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई है।
यूनियन ने दिया डिप्टी कमिश्नर को दिए सुझाव
दंपत्ति केस: यदि पति पत्नी दोनों सरकारी सेवा में है तो उनमें किसी एक की ही ड्यूटी लगाई जाए।
महिलाओं को दी जाए छूट: दो साल से छोटे बच्चों की माताओं व गर्भवती महिलाओं को ड्यूटी से विशेष छूट दी जाए।
विभाग की भागेदारी: सिर्फ शिक्षा विभाग पर बोझ डालने की बजाय, अलग अलग सरकारी विभागों के मुलाजिमों की गिनती के अनुपात के अनुसार ड्यूटी लगाई जाए।
स्कूल के काम का नुकसान: स्कूल के स्टाफ में एक समय सिर्फ एक ही अध्यापक की ड्यूटी लगाई जाए ताकि बच्चों की पढ़्ाई का नुकसान न हो।
तकनीकी सहायता: आन लाइन काम को सुचारु ढंग से करने के लिए फील्ड स्टाफ की सहायता के लिए एक आपरेटर मुहैया करवाया जाए।
क्लर्कों की कम का बोझ भी अध्यापकों पर
सरकारी स्कूलों में क्लर्कों की बहुत कमी है। क्लर्कों की कमी के कारण अध्यापकों को डाक भी तैयार करनी होती है। ऑनलाइन पोर्टल ई पंजाब अपडेट रेगुलर करना होता है। मिड डे मील के हिसाब किताब रखना व अन्य फालतू रिपोर्ट भेजने का काम भी अध्यापकों को करना पड़ता है। यह सारा काम अध्यापकों के असल उद्देश्य पढ़ाने में बड़ी रुकावट है।
दैनिक जागरण