आप सरकार में टूटे सारे रिकॉर्ड, रोज दर्ज हो रहे 58 केस, जानें आंकड़े!
Punjab Drug Crisis Analysis: पंजाब में सरकारें बदलीं लेकिन नशा संकट बरकरार है। AAP सरकार के कार्यकाल में NDPS केसों के रिकॉर्ड टूटे।
25 सितंबर, 2026 – पंजाब के लेखकों व बुद्धिजीवियों में यह बात प्रसिद्ध है कि जब बौद्धिक जुगाली करने का कोई विषय न हो तो नशा यहां का स्थाई विषय तो है ही। पंजाब में नशे का मुद्दा पिछले करीब डेढ़ दशक से राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। अकाली दल की सरकार के खिलाफ 2017 के विधानसभा चुनावों में नशा सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में शामिल रहा। सरकार बदली तो नशा खत्म करने के वादे हुए व बदला कुछ भी नहीं।
2022 के चुनावों में भी नशा फिर बड़ा मुद्दा बना और अब 2027 के चुनावों से पहले एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। प्रश्न अब सिर्फ यह नहीं कि पंजाब में नशा कितना है? बड़ा सवाल यह है कि पिछले 15 सालों में सरकारों द्वारा की गई कार्रवाई का जमीनी असर क्या रहा? नशा तस्करी के मामले, बरामदगी, नशे से होने वाली मौतें और इलाज के लिए नशा मुक्ति केंद्रों में स्थिति क्या है? क्यों अभी भी नशे का मुद्दा सुलझ नहीं सका और आज भी यह बड़ा चुनावी मुद्दा क्यों बना हुआ है?
आप सरकार के समय टूटा नशों का रिकॉर्ड
साल 2016 में जब उड़ता पंजाब फिल्म आई तो इसका सबसे अधिक प्रचार व इसको लेकर नशे का मुद्दा दिल्ली की सीमा से निकलने को बेताब आम आदमी पार्टी ने उठाया। लेकिन फायदा कांग्रेस को हुआ परंतु एक और संयोग देखें कि साल 2022 के विधानसभा चुनावों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा नशा ही बना और आम आदमी पार्टी ने बंपर जीत हासिल की। लेकिन रुकिए, संयोगों का क्रम यहीं समाप्त नहीं हो रहा, आज पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ भी यही नशा सबसे बड़ा मुद्दा बनता नजर आरहा है। हो भी क्यों ना, आम आदमी पार्टी की सरकार के इस कार्यकाल में पंजाब ने नशे के सारे रिकार्ड जो तोड़ डाले हैं। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो सामने आता है कि जनवरी 2002 से अब तक राज्य में स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत 2,45,995 केस दर्ज हो चुके हैं।
जब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की पहली पारी (2002-07) थी, तब पांच सालों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 15,990 केस दर्ज हुए थे, जो औसतन 9 केस प्रति दिन बनते हैं। उसके बाद अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार (2007-2012) के दौरान केसों का आंकड़ा बढक़र 27,348 हो गया था। इस समय के दौरान प्रति दिन औसतन 15 केस दर्ज होते रहे। गठबंधन की अगली पारी (2012-2017) के दौरान आंकड़ा दोगुना हो गया, यानी इन पांच सालों में 55,402 केस दर्ज किए गए। कैप्टन अमरिंदर सिंह की दूसरी पारी (2017-22) के दौरान 52,427 केस दर्ज हुए थे, जो औसतन 29 केस प्रति दिन बनते थे। वर्तमान आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली भगवंत मान की सरकार ने अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 94,828 केस दर्ज किए हैं, जो औसतन 58 केस प्रति दिन बनते हैं।
बढ़ते ही जा रहे नशे के आंकड़े
केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में नशे के इस्तेमाल और तस्करी से जुड़ी समस्या लगातार बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में नशीले पदार्थों से जुड़े मामले 2019 में 11,536 थे जो 2020 में घटकर 6,909 हुए, लेकिन 2021 में 9,972 और 2022 में 12,442 तक पहुंच गए।
एनडीपीएस के तहत नशों की कुल बरामदगी
इसके साथ ही पंजाब में एनडीपीएस के तहत विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की कुल बरामदगी 2020 में लगभग 37,365 किलोग्राम थी, जो 2022 में लगभग 49,422 किलोग्राम हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद गैरकानूनी सप्लाई का जाल खत्म नहीं हुआ है।
नशे से होने वाली मौतें
नशे के मुद्दे का सबसे गंभीर पहलू इससे होने वाली मौतें हैं। गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में नशे की ओवरडोज से 2021 में 78, 2022 में 144 और 2023 में 89 मौतें दर्ज हुईं। 2024 में भी पंजाब में नशे की ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज हुईं। इस आंकड़े के साथ पंजाब देश में दूसरे स्थान पर रहा।
नशे की ओवरडोज से हुई मौतें
यहाँ एक और बात भी महत्वपूर्ण है। सरकारी आंकड़ों में दर्ज ओवरडोज से हुई मौतों को पंजाब में नशे के कारण होने वाली कुल मौतों के बराबर नहीं माना जा सकता। पंजाब पुलिस द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2020 से मार्च 2023 तक राज्य में नशीले और मनोवैज्ञानिक पदार्थों की ओवरडोज से 266 मौतें दर्ज हुई थीं।
कार्रवाई बढ़ी, पर क्या नशे की मांग घटी?
पंजाब सरकार द्वारा 1 मार्च 2025 से शुरू की गई ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के तहत 3 सितंबर 2026 तक राज्य में एनडीपीएस के तहत 59,293 मामले दर्ज करके 25,339 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया है। इनमें 696 बड़े तस्कर भी शामिल हैं, जिनके पास 2 किलो से अधिक हेरोइन थी।
मार्च 2025 से 3 सितंबर 2026 तक बरामद किया गया नशा
इस दौरान 3,757 किलो हेरोइन, 964 किलो अफीम, 45 टन चूरा पोस्त (भुक्की), 1,288 किलो गांजा, 71 किलो मेथामफेटामाइन और 62 लाख गोलियां व कैप्सूल बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। सरकार के मुताबिक ‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ पर आई 51,979 सूचनाओं ने भी इस कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।
नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल मरीजों की संख्या
पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या में पिछले दो वर्षों के दौरान बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में 9,577 मरीज दाखिल हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढक़र 25,290 हो गई—यानी एक साल में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। 2026 में भी यह रुझान जारी रहा और जुलाई 2026 तक 14 हजार से अधिक मरीज सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके थे।
सरकारी पुनर्वास केंद्रों में मरीजों की संख्या
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, सरकारी पुनर्वास केंद्रों में दाखिले 2024 के 2,644 से बढक़र 2025 में 8,574 हुए, जो 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है; जबकि जुलाई 2026 तक यहाँ 5,800 से अधिक मरीज दाखिल हो चुके थे। इसके अलावा, ओपिऑइड असिस्टेड ट्रीटमेंट केंद्रों में नए मरीजों का पंजीकरण भी 2024 में 13,033 से बढक़र 2025 में 17,702 हुआ और अगस्त 2026 तक 12,500 से अधिक नए मरीज पंजीकृत हो चुके थे। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजाब में नशा छुड़ाने के लिए इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
युवतियां भी हुई शिकार
देखने में आया है कि आजकल सिर्फ युवा लडक़े ही नहीं, बल्कि कई जिलों से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जहाँ युवा लड़कियां भी सरेआम टीके लगा रही हैं, ओवरडोज से गिर रही हैं और मीडिया इंटरव्यू में खुलकर स्वीकार कर रही हैं कि वे नशा करती हैं।
ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी
पहले नशा ट्रेनों और बसों या निजी वाहनों के जरिए आता था, लेकिन अब ड्रोन के जरिए तस्करी हो रही है। ड्रोन से आने वाले नशे को रोकना हमारी सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है। पुलिस की सख्ती, रोजाना करोड़ों रुपये की हेरोइन, अफीम/पोस्त व सिंथेटिक ड्रग्स की बरामदगी और हजारों मुकदमों के दावों के बावजूद नशा आसानी से मिल रहा है।
जिन्होंने नशा पकड़वाया, तस्करों ने उनकी टांगें तोड़ीं
कई मामलों में यह देखने को मिला है कि पुलिस जिन मामलों में एफआईआर दर्ज कर सख्ती का दावा करती है, बाद में पता चलता है कि जिन्होंने नशा पकड़वाया था, तस्कर उन्हीं की टांगें तोडक़र चले गए। नशा छोडऩे के इच्छुक युवाओं को जब नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया जाता है, तो वे कुछ दिन ठीक रहते हैं लेकिन बाहर आते ही दोबारा लत में पड़ जाते हैं। कई जगहों (जैसे मोहाली) में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहाँ पीड़ित 15-20 फीट ऊंची दीवारें फांदकर भाग गए।
2029 तक भारत होगा नशा मुक्त
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2029 तक भारत को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है और इसके लिए साल 2026-29 के वास्ते 3 साल का समयबद्ध रोडमैप तैयार किया गया है। स व्यापक रोडमैप में 4 मुख्य स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन-पॉइंट शामिल किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान 2029 से संबंधित मीडिया कार्यक्रम के दौरान पीआईबी के अपर महानिदेशक राज कुमार और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उत्तरी ज़ोन के निदेशक अमनजीत सिंह ने इस योजना का खुलासा किया। यह विजन डॉक्यूमेंट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 26 जून 2026 को 10वीं एपेक्स कमेटी की बैठक के दौरान जारी किया गया था।
रोडमैप के 4 मुख्य स्तंभ
नेटवर्क-केंद्रित कार्रवाई: पहला स्तंभ खुफिया जानकारी और ऑपरेशन-आधारित कार्रवाई पर केंद्रित है, जिसमें नशा तस्करी करने वाले नेटवर्क की पहचान करके उन्हें खत्म करना और उनकी वित्तीय संपत्तियों को जब्त या सील करना शामिल है। इसके अलावा, 2029 तक विदेशों से नशा तस्करी चला रहे 100 प्रमुख भगोड़ों को वापस लाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
सिंथेटिक और केमिकल ड्रग्स पर लगाम
दूसरे स्तंभ के तहत अवैध प्रयोगशालाओं पर शिकंजा कसा जाएगा और प्रिकर्सर केमिकल्स के निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) से लेकर खपत तक 100 फीसदी डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
मांग घटाना और जागरूकता
तीसरा स्तंभ आम लोगों में जागरूकता फैलाने, नशों के हानिकारक प्रभावों को कम करने और नशा-मुक्ति व पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करने से संबंधित है।
क्षमता निर्माण और समन्वय
चौथे स्तंभ के तहत मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह से सुसज्जित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन करने और फोरेंसिक रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
स्कूलों-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा घेरा
शिक्षा संस्थानों के पास नशे की पहुंच रोकने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे को प्रस्तावित सुरक्षित क्षेत्र (सेफ ज़ोन) के रूप में चिह्नित किया जाएगा। युवाओं को जोडक़र 1 लाख नशा मुक्त मित्र तैयार करने का लक्ष्य है।
पांचजन्य